पूर्व जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट से बड़ा झटका, ट्विशा शर्मा मौत मामले में जमानत अर्जी खारिज

Vin News Network
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ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को राहत नहीं

विन न्यूज़ नेटवर्क। भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहा कि इस चरण में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।

कोर्ट ने यह भी माना कि जिस स्थान पर यह कथित घटना हुई, वहीं गिरिबाला सिंह का निवास है। ऐसे में उन्हें जमानत देने से जांच और साक्ष्यों पर संभावित प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने उनकी जमानत अर्जी अस्वीकार कर दी।

रिटायर्ड जज और उनका बेटा फिलहाल जेल में बंद

इस मामले में आरोपी पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। दोनों से कई दिनों तक पूछताछ करने के बाद एजेंसी ने उन्हें कोर्ट में पेश किया था।

सीबीआई की पांच दिन की रिमांड पूरी होने के बाद 2 जून 2026 से दोनों भोपाल सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। इसी दौरान गिरिबाला सिंह ने नियमित जमानत के लिए अदालत का रुख किया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार नहीं की।

न्यायिक हिरासत पहले ही बढ़ा चुकी है अदालत

इससे पहले 14 जुलाई को भोपाल की अदालत ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ाने का आदेश दिया था।

सीबीआई ने अदालत को बताया था कि जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया जा रहा है। एजेंसी ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक आरोपियों का न्यायिक हिरासत में रहना आवश्यक है। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए हिरासत बढ़ा दी थी।

वॉयस सैंपल देने में सहयोग नहीं करने का आरोप

मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया था कि जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने वॉयस सैंपल देने की प्रक्रिया में पूरा सहयोग नहीं किया।

पीड़ित पक्ष के वकील अंकुर पांडे के अनुसार, समर्थ सिंह ने वॉयस सैंपल देने से साफ इनकार कर दिया था। वहीं गिरिबाला सिंह ने शुरुआत में एक सैंपल दिया, लेकिन बाद में प्रक्रिया पूरी करने से मना कर दिया। जांच एजेंसी ने इस तथ्य को भी अदालत के समक्ष रखा था।

सीबीआई का कहना है कि वॉयस सैंपल और अन्य फोरेंसिक जांच इस मामले की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

12 मई को ससुराल में मिला था ट्विशा शर्मा का शव

ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। घटना के बाद ससुराल पक्ष ने दावा किया था कि उन्होंने आत्महत्या की है।

हालांकि, ट्विशा के मायके वालों ने इस दावे को खारिज करते हुए हत्या का आरोप लगाया था। परिवार का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।

यही वजह रही कि मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा और बाद में हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ दोबारा पोस्टमॉर्टम

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एम्स, नई दिल्ली में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया था। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया था कि शुरुआती जांच पूरी तरह निष्पक्ष नहीं थी।

इसके बाद हाईकोर्ट ने 25 मई को पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो।

सीबीआई की जांच अभी भी जारी

सीबीआई फिलहाल इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। एजेंसी फोरेंसिक सबूत, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और गवाहों के बयानों का विश्लेषण कर रही है।

जांच एजेंसी का कहना है कि सभी वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इसी कारण अदालत ने भी माना कि जांच पूरी होने से पहले आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।

क्या होगा अगला कदम?

गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब सभी की नजर सीबीआई की अगली कार्रवाई पर है। जांच एजेंसी जल्द ही अपनी जांच को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। वहीं, पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे निष्पक्ष जांच के जरिए न्याय मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

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