विन न्यूज़ नेटवर्क। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम से जुड़े कथित चढ़ावा विवाद के बीच श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। समिति ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निजी सचिव प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनके खिलाफ सामने आई गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं और प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद की गई है। समिति का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
3 जुलाई को जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस
BKTC की ओर से जारी आदेश के अनुसार, प्रमोद नौटियाल के खिलाफ अपने पद से जुड़े दायित्वों के निर्वहन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इन आरोपों को देखते हुए 3 जुलाई 2026 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उनसे आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था और साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन भी किया गया।
जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में मिले आरोपों के संकेत
समिति को प्राप्त स्पष्टीकरण और जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट की समीक्षा के बाद प्रशासन ने पाया कि आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं।
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच जारी रखने के लिए संबंधित कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि कर्मचारी को वर्तमान पद पर बनाए रखा गया तो जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर समिति ने प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला लिया।
ज्योतिर्मठ कार्यालय से किया गया संबद्ध
निलंबन आदेश के साथ ही प्रमोद नौटियाल को बीकेटीसी कार्यालय, ज्योतिर्मठ (जनपद चमोली) से संबद्ध कर दिया गया है। जांच पूरी होने तक वे अपने पूर्व पद पर कार्य नहीं करेंगे। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर BKTC का जोर
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि समिति प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। समिति ने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर बिना किसी भेदभाव के नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कुछ शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच शुरू की गई। हालांकि समिति ने फिलहाल जांच के विषय में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई यह संकेत देती है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
जांच पूरी होने तक जारी रहेगी कार्रवाई
समिति ने स्पष्ट किया है कि अभी जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं तो संबंधित नियमों के तहत कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन ने यह भी कहा कि किसी भी कर्मचारी को जांच प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
धार्मिक संस्थानों में प्रशासनिक जवाबदेही का संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश भी देती है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का यह कदम भविष्य में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।