दिल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को 13 दिनों की प्रवर्तन निदेशालय (ED) हिरासत में भेज दिया है। साकेत कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने रात 11 बजे अपने चैंबर में जावेद सिद्दीकी को पेश किया और रिमांड आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि सिद्दीकी पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, फर्जी मान्यता का दावा करने और विश्वविद्यालय से प्राप्त धन को अन्यत्र स्थानांतरित करने का संदेह है। ED ने आरोप लगाया कि इस दौरान अर्जित 415.10 करोड़ रुपये की राशि अपराध से प्राप्त मानी जा सकती है, क्योंकि विश्वविद्यालय ने अपनी वैधानिक स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था।
ईडी सूत्रों के अनुसार, सिद्दीकी की हिरासत में पूछताछ इसलिए जरूरी है ताकि अपराध की आगे की कड़ियों का पता लगाया जा सके, संपत्तियों को नष्ट होने से रोका जा सके, और गवाहों या सबूतों पर किसी प्रकार का दबाव न पड़े। सिद्दीकी की गिरफ्तारी उन छापों के बाद हुई, जो ED ने यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े लगभग 25 ठिकानों पर मंगलवार को मारे थे। इस मामले में लाल किला कार बम धमाके से भी संबंध पाए गए हैं, क्योंकि इस धमाके में शामिल डॉक्टर उमर नबी और सफेदपोश आतंकी नेटवर्क के कई सदस्य विश्वविद्यालय से जुड़े हुए थे।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी और विश्वविद्यालय के वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच के बाद ED ने सिद्दीकी को गिरफ्तार किया। अब चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी अगले 13 दिन तक ED की हिरासत में रहेंगे।