महाराष्ट्र में होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (भाजपा–शिवसेना) को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। मतदान से पहले ही गठबंधन के 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। इससे न केवल विपक्षी दलों की रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि राज्य में महायुति की जमीनी पकड़ भी साफ झलकती है।
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख शुक्रवार को समाप्त हुई। इस दौरान कई विपक्षी दलों और अन्य गठबंधनों के उम्मीदवारों ने अपने पर्चे वापस ले लिए, जिससे महायुति के उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया। इनमें से 44 उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हैं, जबकि शेष शिवसेना के खाते में गए हैं। यह आंकड़ा स्थानीय स्तर पर भाजपा की मजबूत संगठनात्मक क्षमता को दर्शाता है।
कल्याण-डोंबिवली में सबसे ज्यादा निर्विरोध जीत
मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में महायुति को सबसे बड़ी सफलता मिली है। यहां कुल 21 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए, जिनमें 15 भाजपा और 6 शिवसेना के उम्मीदवार शामिल हैं। यह इलाका लंबे समय से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां मिली बढ़त को गठबंधन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
जलगांव और पनवेल में भी मजबूत प्रदर्शन
उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव में, जिसे भाजपा और शिवसेना दोनों का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, महायुति ने 12 सीटें बिना मुकाबले जीत लीं। यहां दोनों दलों ने बराबर-बराबर 6-6 सीटें हासिल कीं।
इसी तरह, मुंबई महानगर क्षेत्र के पनवेल में भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए 7 उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताया। यह परिणाम दिखाता है कि शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में भाजपा का संगठन कितना प्रभावी है।
भीवंडी में NCP गढ़ में सेंध
भीवंडी, जो लंबे समय से एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है, वहां भी भाजपा ने 6 निर्विरोध जीत दर्ज कीं। इसे राजनीतिक विश्लेषक विपक्ष के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं, क्योंकि यह क्षेत्र अब तक महायुति के लिए आसान नहीं माना जाता था।
ठाणे में शिवसेना की पकड़ बरकरार
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह जिले ठाणे में भाजपा और शिवसेना के बीच कथित तनाव की चर्चाओं के बावजूद, शिंदे गुट की शिवसेना ने यहां 6 सीटें निर्विरोध जीतने में सफलता पाई। हालांकि, इसी जिले में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन के रवैये पर सवाल उठाए गए।
धुले और अहिल्यानगर की स्थिति
धुले में भाजपा के 3 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। वहीं अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) में मुकाबला अपेक्षाकृत संतुलित रहा, जहां एनसीपी ने 2 सीटें और भाजपा ने 1 सीट निर्विरोध जीती।
महायुति के लिए राजनीतिक बढ़त
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये निर्विरोध जीतें महायुति गठबंधन के लिए राजनीतिक संजीवनी का काम करेंगी। हाल ही में हुए नगर परिषद चुनावों में लगभग क्लीन स्वीप के बाद यह सफलता गठबंधन के आत्मविश्वास को और मजबूत करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, निर्विरोध जीत का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे दलों के संसाधन और कार्यकर्ता अन्य सीटों पर प्रचार अभियान पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। इससे आने वाले चरणों में महायुति को और लाभ मिलने की संभावना है।
विपक्ष के लिए चेतावनी
महाराष्ट्र के विभिन्न नगर निकायों में बिना मतदान के इतनी बड़ी संख्या में सीटों का तय हो जाना विपक्षी दलों के लिए स्पष्ट चेतावनी है। यह नतीजे दिखाते हैं कि जमीनी स्तर पर संगठन, रणनीति और तालमेल में महायुति फिलहाल विपक्ष से कहीं आगे नजर आ रही है।
जैसे-जैसे शेष सीटों के लिए मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, इन निर्विरोध जीतों ने राज्य की राजनीति की दिशा और चुनावी माहौल को काफी हद तक प्रभावित कर दिया है।