विन न्यूज़ नेटवर्क। आधुनिक खेती में ट्रैक्टर, रोटावेटर, रीपर, हार्वेस्टर, सीड ड्रिल और कल्टीवेटर जैसे कृषि यंत्रों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इन मशीनों से खेती आसान होने के साथ समय और श्रम दोनों की बचत होती है। लेकिन इनकी ऊंची कीमत छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी रहती है। ऐसे में अब बड़ी संख्या में किसान कृषि यंत्र खरीदने के बजाय किराये पर लेकर खेती करना अधिक लाभदायक मान रहे हैं।
केंद्र और राज्य सरकारें भी इस दिशा में किसानों को प्रोत्साहित कर रही हैं। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि मशीनें किराये पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।
महंगी मशीनें खरीदना हर किसान के लिए संभव नहीं
खेती में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों की कीमत लाखों रुपये तक होती है। ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और अन्य भारी मशीनें खरीदने के लिए किसानों को अक्सर कर्ज लेना पड़ता है। इसके बाद ईएमआई, ब्याज, डीजल, मरम्मत और रखरखाव का खर्च भी अलग से उठाना पड़ता है।
छोटे किसानों के लिए यह निवेश कई बार आर्थिक बोझ बन जाता है, क्योंकि इन मशीनों का उपयोग पूरे साल नहीं होता। ऐसे में उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
किराये पर मशीन लेने से कम होता है खर्च
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी मशीन की जरूरत केवल कुछ दिनों के लिए है, तो उसे किराये पर लेना अधिक किफायती विकल्प साबित होता है। किसान केवल उतनी अवधि का भुगतान करते हैं, जितने समय तक मशीन का उपयोग किया जाता है।
इससे न तो मशीन की देखरेख की चिंता रहती है और न ही उसके खराब होने का जोखिम उठाना पड़ता है। साथ ही किसानों को हर सीजन में नई तकनीक वाली मशीनों का इस्तेमाल करने का अवसर भी मिल जाता है।
सरकार कैसे कर रही है किसानों की मदद?
केंद्र सरकार कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर (Custom Hiring Centres) और फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों के माध्यम से किसान ट्रैक्टर, हैप्पी सीडर, रीपर, थ्रेशर, पावर टिलर, सीड ड्रिल, रोटावेटर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्र निर्धारित किराये पर प्राप्त कर सकते हैं।
कई राज्यों ने इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप भी विकसित किए हैं, जहां किसान अपने क्षेत्र में उपलब्ध मशीनों की जानकारी लेकर आसानी से बुकिंग कर सकते हैं।
कम लागत में बढ़ सकती है पैदावार
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसान मशीन खरीदने में बड़ी राशि खर्च नहीं करते, तो बची हुई पूंजी का उपयोग अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक, सिंचाई और फसल प्रबंधन पर किया जा सकता है।
इसका सीधा असर उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ता है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना भी अधिक होती है। आधुनिक मशीनों के उपयोग से खेती का काम समय पर पूरा होता है और श्रमिकों पर निर्भरता भी कम होती है।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहतर विकल्प
देश में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से जुड़े हैं। ऐसे किसानों के लिए कृषि यंत्र किराये पर लेना आर्थिक रूप से अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान सरकारी योजनाओं और कस्टम हायरिंग सेंटर की सुविधाओं का अधिक उपयोग करें, तो खेती की लागत कम करने के साथ उत्पादन बढ़ाना भी संभव है। यही वजह है कि अब कृषि यंत्रों का साझा उपयोग और किराये की व्यवस्था आधुनिक खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।