रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य में स्थित एक प्रमुख स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी उस समय दहशत का केंद्र बन गई, जब विदेशी छात्रों के हॉस्टल में अचानक एक हिंसक हमला हुआ। शनिवार को हुए इस हमले में 15 वर्षीय एक किशोर ने चाकू से कई छात्रों पर वार किया, जिसमें चार भारतीय छात्रों सहित कम से कम छह लोग घायल हो गए। इस घटना में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए, जो हालात की गंभीरता को दर्शाता है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हमला पूरी तरह सुनियोजित और वैचारिक नफरत से प्रेरित था। आरोप है कि हमलावर ने हमले के दौरान होलोकॉस्ट से जुड़े आपत्तिजनक और घृणास्पद नारे लगाए। रूसी मीडिया चैनलों का दावा है कि आरोपी एक प्रतिबंधित नव-नाजी संगठन से जुड़ा हुआ था, जिसे रूस के सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2021 में आतंकी संगठन घोषित किया था।
बताया जा रहा है कि यह किशोर ‘नेशनल सोशलिज्म / व्हाइट पावर क्रू’ नामक समूह से प्रभावित था, जिसे ‘स्पैरोस क्रू’ के नाम से भी जाना जाता है। यह संगठन पहले भी पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमलों के आरोपों में घिरा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस तरह के संगठनों का मकसद नस्लीय श्रेष्ठता और घृणा को बढ़ावा देना होता है।
घटना के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया। एक वीडियो में हॉस्टल की दीवार पर खून से बना स्वस्तिक चिन्ह दिखाई दिया, जिसे देखकर छात्र और स्थानीय लोग सहम गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत हॉस्टल को खाली कराया और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
जब पुलिस ने आरोपी को काबू में करने की कोशिश की, तब उसने गिरफ्तारी का विरोध किया और इस दौरान दो पुलिस अधिकारियों पर भी चाकू से हमला कर दिया। रूसी गृह मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष के दौरान आरोपी ने खुद को भी गंभीर चोटें पहुंचाईं। फिलहाल उसे एक बच्चों के अस्पताल में कड़ी निगरानी में इलाज दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि घायलों में से एक की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य की स्थिति स्थिर लेकिन मध्यम श्रेणी की है। भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर भारतीय दूतावास ने भी स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया है और लगातार हालात पर नजर रखी जा रही है।
यह घटना ऊफा शहर में हुई, जो मॉस्को से लगभग 1,200 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। स्थानीय प्रशासन ने इस हमले को गंभीर सुरक्षा चूक मानते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि विदेशी छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी रह गई और कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े लोग परिसर तक कैसे पहुंचे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक आपराधिक हमला नहीं, बल्कि बढ़ते चरमपंथ और नस्लीय नफरत की गंभीर चेतावनी है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब विश्वविद्यालयों और सरकारों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।