नई दिल्ली। केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है, जिसकी तारीख अब से ठीक दो दिन बाद तय की गई है। इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने हर संभव कूटनीतिक और कानूनी प्रयास किए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद निमिषा की फांसी रोकने में सफलता नहीं मिल सकी।
क्या है मामला?
निमिषा प्रिया पर यमन में एक स्थानीय नागरिक की हत्या का आरोप है। बताया गया कि यह मामला आपसी विवाद और धोखे से जुड़ा हुआ है, जिसमें निमिषा ने कथित रूप से आत्मरक्षा में यह कदम उठाया था। यमन की अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे अब अमल में लाया जा रहा है।
भारत की अपील हुई खारिज
भारत सरकार ने निमिषा की सजा टालने और पुनर्विचार की अपील की थी। इसके लिए कूटनीतिक माध्यमों से यमन सरकार से संपर्क किया गया और मानवीय आधार पर राहत की मांग की गई। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की मदद से कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश भी की गई, लेकिन यमन की न्यायपालिका ने भारत की हर अपील को खारिज कर दिया।

कैसे बच सकती है निमिषा की जान?
केंद्र सरकार के अनुसार, हर कोशिश की एक सीमा होती है। अब इससे ज्यादा हम क्या कर सकते हैं। निमिषा को बचाने का सिर्फ एक ही रास्ता है कि अगर मृतक शख्स का परिवार मुआवजा स्वीकार कर ले तो निमिषा की फांसी रुक सकती है।
8.5 करोड़ के मुआवजे का दिया गया था ऑफर
केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर.वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ में सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि मृतक के परिवार को 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.5 करोड़) रुपये के मुआवजे का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
परिवार में गहरा शोक, देशभर में चिंता
निमिषा के परिवार ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाई थी। इस बीच कई सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी यमन सरकार से दया याचिका पर विचार करने की अपील की। हालांकि अब जब फांसी की तारीख तय हो चुकी है, तो परिवार में शोक और निराशा का माहौल है।