ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच इज़रायल ने सुरक्षा स्तर को उच्चतम सतर्कता पर रखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़रायल इस आशंका को लेकर अलर्ट पर है कि अमेरिका किसी भी समय ईरान में हस्तक्षेप कर सकता है। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब तेहरान सहित देश के कई हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इज़रायली सुरक्षा एजेंसियों ने बीते सप्ताहांत उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों में मौजूद तीन ईरानी सूत्रों ने पुष्टि की कि अमेरिका की संभावित सैन्य या राजनीतिक दखलअंदाजी को ध्यान में रखते हुए इज़रायल पूरी तरह सतर्क है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस हाई अलर्ट की स्थिति व्यावहारिक रूप से किन कदमों के रूप में लागू की गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि अमेरिका ईरान को मौजूदा नेतृत्व से “मुक्ति” दिलाने के लिए तैयार है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान पहले से कहीं ज्यादा आज़ादी की ओर देख रहा है और अमेरिका हर संभव मदद देने को तैयार है।
अमेरिका और इज़रायल के बीच बातचीत
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की। इस चर्चा में ईरान की स्थिति और अमेरिका की संभावित भूमिका पर विस्तार से बात हुई। हालांकि, इज़रायल की ओर से सार्वजनिक रूप से यह संकेत नहीं दिया गया है कि वह खुद ईरान में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना चाहता है।
इज़रायली अधिकारियों का कहना है कि उनका प्राथमिक ध्यान क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित प्रतिक्रियाओं पर है। वे ईरान में किसी भी बड़े बदलाव के असर को लेकर तैयार रहना चाहते हैं, खासकर तब जब अमेरिका कोई निर्णायक कदम उठाता है।
ट्रंप की चेतावनी और वॉशिंगटन की चिंता
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग जारी रहा तो अमेरिका प्रतिक्रिया देगा। शुक्रवार को उन्होंने ईरानी अधिकारियों से कहा था कि वे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी न करें। यह बयान ऐसे समय आया जब वॉशिंगटन में ईरान की कार्रवाई को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है।
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान में हालात मानवाधिकार संकट की ओर बढ़ रहे हैं। लगातार बढ़ती मौतों और गिरफ्तारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।
ईरान पर पहले भी हमला कर चुका है अमेरिका
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की हो। जून महीने में अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन ठिकानों पर कम से कम छह बंकर-बस्टर बम गिराए थे। इनमें ईरान का फोर्डो परमाणु संवर्धन केंद्र भी शामिल था, जो पहाड़ के नीचे लगभग 300 फीट गहराई में स्थित है।
ये हमले उस समय किए गए थे जब ईरान ने इज़रायल के खिलाफ परमाणु क्षमता के इस्तेमाल की धमकी दी थी। उस दौरान दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक चले संघर्ष में अमेरिका और इज़रायल ने समन्वय के साथ ईरान के सैन्य ढांचे को निशाना बनाया था।
खामेनेई का तीखा पलटवार
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने हैं और उन्हें अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। खामेनेई ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान में प्रदर्शन करने वाले लोग अमेरिका को खुश करने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि ये प्रदर्शन विदेशी साजिश का हिस्सा हैं, जबकि प्रदर्शनकारी महंगाई, बेरोजगारी, राजनीतिक दमन और धार्मिक शासन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
ईरान में बढ़ता दमन और बढ़ती मौतें
ईरानी प्रशासन ने देशभर में प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस और सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी गई है, जिसके चलते हिंसा में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन को दो सप्ताह पूरे हो चुके हैं। इस दौरान हिंसा में कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। ये आंकड़े अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी ने जारी किए हैं।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई घटनाएं सामने ही नहीं आ पा रही हैं। इंटरनेट प्रतिबंध और मीडिया पर नियंत्रण के कारण जानकारी का प्रवाह सीमित है।
क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ईरान में हस्तक्षेप करता है, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ेगा। इज़रायल, खाड़ी देश और अन्य क्षेत्रीय ताकतें इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
इज़रायल के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि ईरान उसके लिए लंबे समय से रणनीतिक चुनौती बना हुआ है। इसी कारण इज़रायल किसी भी अप्रत्याशित घटनाक्रम के लिए तैयार रहना चाहता है।
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन अब केवल आंतरिक मामला नहीं रह गए हैं। अमेरिका की बयानबाज़ी, इज़रायल की हाई अलर्ट स्थिति और ईरान की सख्त कार्रवाई ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि अमेरिका केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहता है या वास्तव में कोई ठोस कदम उठाता है।
इज़रायल पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि ईरान में जनता और सरकार के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। यह संकट न केवल ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।