भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति के बीच, भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर के बारे में नई जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने संभावित तनाव की स्थिति में “भारी तैयारी” कर रखी थी और यदि स्थिति और बिगड़ती, तो वह “ग्राउंड ऑपरेशन” के लिए भी तैयार था।
सेना प्रमुख ने एक कार्यक्रम में यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत ने व्यापक स्तर पर सेना की तैनाती और मोबलाइजेशन किया था। उनका यह बयान जम्मू-कश्मीर में हाल ही में नियंत्रण रेखा (LoC) पर कई ड्रोन गतिविधियों की रिपोर्ट के कुछ दिन बाद आया है। हालांकि, जनरल द्विवेदी ने अधिक तकनीकी विवरण साझा नहीं किए, लेकिन उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति “संवेदनशील है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है।”
ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी
जनरल द्विवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मई 2025 में शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर को अभी भी सक्रिय रखा गया है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना पूरी सतर्कता के साथ तैनात है। “हमने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आवश्यक सभी कार्रवाई पहले ही सुनिश्चित कर दी है। हमारी आँखें और कान पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब दिया जाएगा।”
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादी कैंपों के संदर्भ में उनके पास जानकारी है कि लगभग आठ कैंप अभी भी सक्रिय हैं। इनमें से दो कैंप अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास हैं और छह नियंत्रण रेखा के पास स्थित हैं। “इन कैंपों में कुछ प्रशिक्षण और गतिविधियां अभी भी जारी हैं। यदि ऐसी गतिविधियां दोबारा होती हैं, तो हमारी योजना अनुसार तुरंत कार्रवाई की जाएगी।”
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत मई 2025 में हुई थी, जो कि भारत की प्रतिक्रिया थी फरवरी 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले पर। इस हमले में कम से कम 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। यह कश्मीर घाटी में 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे भयावह हमला माना गया।
भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की सहायक इकाई, द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि TRF और पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया, भारत ने फिर भी पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू की।
इस त्रि-सेना (आर्मी, नेवी और एयरफोर्स) अभियान के दौरान भारतीय सेनाओं ने क्षेत्र में नौ आतंकवादी कैंपों पर एयर स्ट्राइक और जमीन से कार्रवाई की। ऑपरेशन के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक तनावपूर्ण गतिरोध (स्टैंड-ऑफ) की स्थिति रही। नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर ब्लैकआउट और एयर रैड अलार्म जैसी सावधानियां लागू की गईं।
सेना की सतर्कता और तैयारी
जनरल द्विवेदी ने प्रेस वार्ता में यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की वजह से सेना ने हर स्थिति के लिए तैयारी कर रखी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि भविष्य में पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि होती है, तो भारतीय सेना त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि एहतियात और निगरानी के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह अभियान भारत के जम्मू-कश्मीर और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय है।
आतंकवादी कैंपों पर नजर
सेना प्रमुख के अनुसार, पाकिस्तान-समर्थित लगभग आठ कैंप अभी भी सक्रिय हैं। नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास इन कैंपों में आतंकवादी प्रशिक्षण, हथियार और संगठनात्मक गतिविधियां हो रही हैं। भारतीय सेना की निगरानी सतत है, और किसी भी संभावित खतरे के तुरंत जवाब देने की क्षमता बनी हुई है।
सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि इन कैंपों में गतिविधियों की जानकारी लगातार अपडेट होती रहती है और ऑपरेशन सिंदूर के तहत सेना उन्हें खत्म करने के लिए तैयार रहती है।
भारत की रणनीति और संदेश
जनरल द्विवेदी के बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत ने न केवल सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि सैन्य रणनीति के लिहाज से भी संभावित तनाव का पूरा आकलन किया था। “हमने भारी तैयारी की और यदि जरूरत पड़ी, तो हम ग्राउंड ऑपरेशन करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।” उन्होंने कहा।
इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि भारत की सैन्य तैयारियों का मकसद केवल आक्रामक नहीं, बल्कि नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही यह संदेश पाकिस्तान को भी स्पष्ट करता है कि किसी भी उकसावे की स्थिति में भारतीय सेना सक्षम है।
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना का एक निर्णायक और सतर्कता पूर्ण अभियान है, जो सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों और भारत-प्रभावित सुरक्षा खतरों पर निगरानी रखता है। जनरल द्विवेदी के बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि भारत ने संभावित संघर्ष की स्थिति में अपनी तैयारी पूरी कर रखी थी और यदि आवश्यकता पड़ती, तो वह ग्राउंड ऑपरेशन करने में सक्षम था।
इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ता दिखाई है और यह संदेश दिया है कि भारत की सुरक्षा और उसकी सीमाओं की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं होगा।