भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में सरकार का पक्ष रखा। बुधवार, 4 फरवरी को सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भारतीय किसानों और देश के संवेदनशील कृषि एवं डेयरी सेक्टर को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते के फ्रेमवर्क को इस तरह तैयार किया गया है कि भारत के राष्ट्रीय हितों और 140 करोड़ लोगों की आवश्यकताओं की पूरी तरह सुरक्षा की जा सके।
पीयूष गोयल का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा के एक दिन बाद आया। मंत्री ने सदन को बताया कि भारत और अमेरिका जल्द ही इस व्यापार समझौते के विस्तृत प्रावधानों को लेकर एक संयुक्त बयान जारी करेंगे।
एक साल से चल रही थी बातचीत
वाणिज्य मंत्री ने लोकसभा में जानकारी दी कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर पिछले एक साल से विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही थी। उन्होंने कहा कि इन चर्चाओं में भारतीय पक्ष ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। गोयल ने कहा, “दोनों देशों ने व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दे दिया है और इसमें भारत की संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा गया है।”
उन्होंने बताया कि अमेरिकी पक्ष के भी कुछ ऐसे क्षेत्र थे, जिन्हें वे अपने दृष्टिकोण से संवेदनशील मानते हैं। करीब एक साल तक चले विचार-विमर्श और कई दौर की बातचीत के बाद दोनों देश समझौते के कई अहम क्षेत्रों पर सहमति बनाने में सफल रहे।
टैरिफ में कटौती पर क्या बोले गोयल
पीयूष गोयल ने सदन में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा घोषित 18 प्रतिशत का टैरिफ कई अन्य देशों पर लगाए गए टैरिफ की तुलना में कम है। उन्होंने इसे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मंत्री के अनुसार, यह ढांचागत समझौता दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में सहयोग बढ़ाएगा।
किन सेक्टरों को मिलेगा फायदा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह व्यापार समझौता विशेष रूप से लेबर-इंटेंसिव और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल, प्लास्टिक, होम फर्निशिंग, चमड़ा और जूते, रत्न एवं आभूषण, ऑर्गेनिक केमिकल्स, रबर उत्पाद, मशीनरी और विमानन जैसे क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुलेंगे। इन क्षेत्रों में कई उत्पादों पर अमेरिकी बाजार में रेसिप्रोकल टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा।
संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा का दावा
पीयूष गोयल ने दोहराया कि भारत ने अपने व्यापार समझौतों में हमेशा डेयरी, चावल, गेहूं, मांस, पोल्ट्री, अनाज, जेनेटिकली मॉडिफाइड खाद्य पदार्थ, सोया आटा और मक्का जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर रखा है। उन्होंने कहा कि इस समझौते में भी खाद और कृषि क्षेत्र से जुड़ी भारत की संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा गया है।
विपक्ष का विरोध और सरकार का जवाब
सदन में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच गोयल ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देशवासियों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को विकसित देश बनने के लिए ऊर्जा, विमानन, डेटा सेंटर और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी, जहां अमेरिका अग्रणी भूमिका निभाता है।
इस बीच कांग्रेस ने व्यापार समझौते को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अब तक समझौते का कोई ठोस और विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है और कृषि आयात को लेकर रियायतों पर स्पष्टता की जरूरत है।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ा संयुक्त बयान जल्द जारी किया जाएगा, जिससे सभी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सके।