भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी मजबूत: 114 राफेल लड़ाकू विमान सौदे से बढ़ेगी वायुसेना की ताकत

Vin News Network
Vin News Network
3 Min Read
114 नए राफेल से बढ़ेगी भारतीय वायुसेना की क्षमता

भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक संबंध एक बार फिर चर्चा में हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron भारत दौरे पर आने वाले हैं, जहां वे प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात करेंगे और AI Impact Summit में भी भाग लेंगे। इसी बीच भारत सरकार ने वायुसेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

रक्षा अधिग्रहण परिषद, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं, ने इस कार्यक्रम को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ प्रदान कर दी है। यह हाल के वर्षों में भारत के सबसे बड़े रक्षा खरीद फैसलों में से एक माना जा रहा है। इस योजना के तहत 18 विमान सीधे तैयार हालत में मिलेंगे जबकि शेष भारत में निर्मित किए जाएंगे।

इस सौदे की खास बात ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्थानीय उत्पादन है। फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation भारतीय निजी कंपनियों के साथ मिलकर लगभग 90 विमानों का निर्माण करेगी। इससे देश में रक्षा निर्माण उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

भारतीय वायुसेना वर्तमान में लगभग 30 स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। सीमावर्ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए नई पीढ़ी के विमानों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। राफेल विमान उन्नत सेंसर, लंबी दूरी की मारक क्षमता और आधुनिक हथियारों के कारण वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ा सकते हैं।

इन विमानों में Meteor मिसाइल और SCALP क्रूज मिसाइल जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां शामिल होंगी, जो दुश्मन के ठिकानों पर दूर से सटीक हमला करने में सक्षम हैं। रक्षा विशेषज्ञ इसे निकट भविष्य में भारत की वायु शक्ति का प्रमुख आधार मानते हैं, खासकर तब तक जब तक स्वदेशी AMCA और तेजस Mk1A कार्यक्रम पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच जाते।

अभी इस सौदे के तकनीकी और व्यावसायिक पहलुओं पर विस्तृत बातचीत बाकी है, जिसमें कीमत, डिलीवरी समय और तकनीकी हस्तांतरण शामिल होंगे। अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर होने में कुछ समय लग सकता है।

यह निर्णय केवल सैन्य शक्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि भारत-फ्रांस रणनीतिक सहयोग को भी मजबूत करता है। दोनों देश पहले से अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और गहरी होगी।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *