विन न्यूज़ नेटवर्क। मछली पालन में बेहतर उत्पादन केवल अच्छे बीज और संतुलित आहार पर निर्भर नहीं करता, बल्कि तालाब के पानी की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाए तो मछलियों की वृद्धि प्रभावित होती है और मृत्यु दर बढ़ सकती है। इसी समस्या के समाधान के लिए एरेटर मशीन का उपयोग किया जाता है।
बिहार सरकार ने मछली पालकों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए एरेटर मशीन खरीदने पर 70 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की योजना शुरू की है। इससे किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिल सकती है।
क्या है एरेटर मशीन?
एरेटर मशीन तालाब के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने का काम करती है। यह पानी को लगातार गतिशील रखती है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर संतुलित बना रहता है। खासकर गर्मियों के मौसम और अधिक घनत्व वाले तालाबों में यह मशीन बेहद उपयोगी मानी जाती है। मत्स्य विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने पर मछलियां अधिक सक्रिय रहती हैं, तेजी से बढ़ती हैं और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
एरेटर मशीन से कैसे बढ़ेगा मुनाफा?
मुख्य फायदे
- पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है।
- मछलियों की वृद्धि तेज होती है।
- रोगों का खतरा कम होता है।
- मृत्यु दर घटती है।
- तालाब की पानी गुणवत्ता बेहतर रहती है।
- कुल उत्पादन और लाभ में वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एरेटर मशीन लगाने से उत्पादन लागत की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
किसे कितनी मिलेगी सब्सिडी?
बिहार सरकार की इस योजना के तहत अलग-अलग वर्गों के मछली पालकों को अलग दर से सहायता दी जा रही है।
सामान्य वर्ग- 50%
SC / ST / अति पिछड़ा वर्ग- 70%
योजना के अनुसार प्रति एकड़ एरेटर प्रणाली की स्वीकृत लागत 10.10 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। यदि किसी पात्र किसान को 70% सब्सिडी मिलती है तो लगभग 7.07 लाख रुपये तक की राशि सरकार वहन करेगी और किसान को केवल करीब 3.03 लाख रुपये ही खर्च करने होंगे।
कैसे करें आवेदन?
इच्छुक किसान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन: fisheries.bihar.gov.in आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन करें
ऑफलाइन: जिला मत्स्य कार्यालय में संपर्क करें, ऑनलाइन आवेदन करते समय सभी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी।
इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
- आधार कार्ड
- बैंक खाते की जानकारी
- तालाब की स्वामित्व रसीद या दस्तावेज
- लीज पर तालाब होने की स्थिति में लीज एग्रीमेंट
- पासपोर्ट साइज फोटो
- जाति प्रमाण पत्र (यदि आरक्षित श्रेणी में आवेदन कर रहे हों)
किसानों के लिए क्यों है फायदेमंद?
बिहार में मछली पालन तेजी से बढ़ता हुआ व्यवसाय बन रहा है। कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। एरेटर मशीन जैसी आधुनिक तकनीक अपनाने से उत्पादन बढ़ाने और नुकसान कम करने में मदद मिलती है। सरकार की सब्सिडी योजना छोटे और मध्यम मछली पालकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जा रही है, क्योंकि इससे शुरुआती निवेश का बोझ काफी कम हो जाता है।