आशा एवं आशा संगिनी को ‘राज्य कर्मचारी’ का दर्जा न मिला तो होगा राष्ट्रव्यापी आंदोलन, संगठन की चेतावनी

सेवा का सम्मान दो, आशाओं को अधिकार दो!

Vin News Network
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गाँव-गाँव की सेवा में समर्पित आशा बहनें, अब माँग रही हैं अपना हक!
Highlights
  • आशा-आशा संगिनी को नियमित कर्मचारी बनाने की माँग।
  • न्यूनतम ₹18,000 और ₹24,000 मासिक वेतन की मांग।
  • 53 से अधिक कार्यों का बोझ, लेकिन कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं।

लखनऊ। देशभर में ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ मानी जाने वाली आशा (Asha) और आशा संगिनी (Asha Sangini) कार्यकर्ताओं ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है—यदि उन्हें ‘राज्य कर्मचारी’ का दर्जा और निश्चित मानदेय नहीं दिया गया, तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय से चली आ रही मांगों की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यकर्ताओं ने कहा है कि वे झुलसती गर्मी, ठिठुरती सर्दी और मूसलाधार बारिश में भी सरकार की नीतियों को धरातल पर लागू करने में अहम भूमिका निभाती रही हैं, फिर भी उन्हें सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायीत्व का अधिकार नहीं मिला।

मुख्य माँगें और मुद्दे

  1. राज्य कर्मचारी का दर्जा और नियमित वेतन
    संगठन ने सरकार से मांग की है कि प्रोत्साहन राशि आधारित मौजूदा भुगतान प्रणाली को समाप्त कर प्रत्येक आशा को ₹18,000 प्रति माह और आशा संगिनी को ₹24,000 प्रति माह निश्चित और नियमित मानदेय दिया जाए।
  2. सामाजिक सुरक्षा का दायरा
    हर आशा कार्यकर्ता को पेंशन, भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) जैसी योजनाओं के तहत लाया जाए। वर्तमान में इन्हें कोई सामाजिक सुरक्षा कवरेज नहीं मिलता।
  3. कार्य का बोझ और प्रशिक्षण
    संगठन का कहना है कि जहां नियुक्ति 8 प्रकार के कार्यों के लिए हुई थी, वहीं 2023-24 की गाइडलाइन के आधार पर 53 प्रकार के कार्य सौंपे गए हैं। कई बार बिना प्रशिक्षण के डाटा एंट्री, सर्वे और कोविड अभियान जैसे कार्य भी कराए जाते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण माँगें

  • हर कार्यकर्ता को 5G टैबलेट या स्मार्टफोन उपलब्ध कराया जाए।
  • जिन कार्यों में प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाती, वे कार्य रोके जाएं।
  • संगिनी बहनों को उनके विस्तृत कार्यक्षेत्र के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटी दी जाए।
  • आशा संगिनी को 30 दिन का मासिक कार्य दिवस तय किया जाए।
  • प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना को पुनः आशा संगिनी को सौंपा जाए।
  • कार्यरत बहनों के असमय निधन पर मुआवजा और परिजनों को नौकरी में प्राथमिकता दी जाए।
  • 20 लाख तक का दुर्घटना बीमा और रिटायरमेंट पर एकमुश्त ₹20 लाख की राशि दी जाए।

कई वर्षों से लंबित हैं मांगे
2005 से सेवा दे रहीं आशा और संगिनी बहनों का कहना है कि अब तक केवल तीन बार मानदेय वृद्धि हुई है—2017, 2022 और प्रस्तावित 2025। लेकिन यह वृद्धि मंहगाई और कार्यभार के अनुपात में नगण्य है। संगठन ने 2025 के प्रस्तावित वृद्धि को भी प्रचार आधारित और अपर्याप्त करार दिया है।

सम्मेलन और जनजागरूकता कार्यक्रमों पर भी सवाल
संगठन ने जिला स्तर पर होने वाले आशा सम्मेलन को बंद कर उस राशि का उपयोग आशा कार्यकर्ताओं के हित में करने की मांग की है। साथ ही, प्राथमिक चिकित्सा किट और परिवार के लिए आयुष्मान कार्ड की मांग को भी मजबूती से उठाया है।

नेतृत्व और संगठनात्मक भूमिका
संगठन का संचालन निम्नलिखित राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं द्वारा किया जा रहा है:

  • राष्ट्रीय संरक्षक: आशीष तिवारी
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष: श्रीमती पुष्पा तिवारी
  • राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: निरमेश त्यागी
  • राष्ट्रीय सचिव: उषा सिंह
  • प्रदेश अध्यक्ष: मनीष यादव
  • प्रदेश उपाध्यक्ष: उर्मिला सिंह
  • प्रदेश महामंत्री: संध्या सिंह
  • प्रदेश सचिव: उषा पटेल
  • सचिव: किरण जी

आशा संगठन की चेतावनी
संगठन का कहना है कि यदि इन मांगों को जल्द नहीं माना गया तो देशव्यापी आंदोलन, हड़ताल और जनजागरण अभियान छेड़े जाएंगे। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप होने की स्थिति में सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

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