‘एक छात्र पर लाठी चलेगी तो चार वोट घटेंगे’, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का सरकार पर हमला

Vin News Network
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अभिजीत दीपके

विन न्यूज़ नेटवर्क। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से ध्यान देने के बजाय सरकार आंदोलन को नियंत्रित करने पर अधिक जोर दे रही है। दीपके ने कहा कि किसी भी छात्र पर बल प्रयोग केवल एक व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं होती, बल्कि उसके पूरे परिवार की भावनाओं को प्रभावित करती है।

उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य किसी भी मंत्री से अधिक महत्वपूर्ण है और सरकार को इस प्राथमिकता को समझना चाहिए।

‘एक छात्र पर कार्रवाई का असर पूरे परिवार पर पड़ता है’

अभिजीत दीपके ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी छात्र पर लाठीचार्ज होता है तो उसका असर केवल उसी छात्र तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने कहा कि एक छात्र के साथ हुई घटना उसके माता-पिता, भाई-बहन और पूरे परिवार को प्रभावित करती है।

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्रों के साथ सख्ती का रास्ता अपनाएगी तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में जनता अपनी नाराजगी चुनाव के माध्यम से भी व्यक्त करती है।

‘छात्रों से बड़ा कोई मंत्री नहीं’

दीपके ने कहा कि यदि करोड़ों छात्रों के भविष्य और एक मंत्री के पद के बीच चुनाव करना पड़े तो सरकार को छात्रों के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक ऐसे मंत्री को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिस पर विपक्ष और आंदोलनकारी लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज करती रही तो इससे युवाओं में असंतोष और बढ़ सकता है।

पेपर लीक पर सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए उतनी ही गंभीरता दिखाई होती, जितनी प्रदर्शन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और पुलिस तैनाती में दिखाई जा रही है, तो हालात अलग हो सकते थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनके अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

छात्रों की आत्महत्या का भी किया उल्लेख

अपने बयान में दीपके ने उन युवाओं का भी जिक्र किया, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा संबंधी तनाव और अनिश्चितता के बीच अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा व्यवस्था मजबूत होती और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर समय रहते रोक लगती तो कई परिवारों को इस तरह का दुख नहीं झेलना पड़ता।

उन्होंने कहा कि सरकार को केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

जंतर-मंतर पर जारी है आंदोलन

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठन लगातार पेपर लीक के मुद्दे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करना शामिल है।

सरकार की ओर से हाल ही में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की गई है। हालांकि आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी अन्य मांगों पर भी ठोस कार्रवाई जरूरी है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज, समाधान पर सबकी नजर

छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों के बयान लगातार सामने आ रहे हैं। अभिजीत दीपके का यह बयान भी इसी क्रम में काफी चर्चा में है।

फिलहाल सरकार का कहना है कि वह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रही है, जबकि आंदोलनकारी संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का कोई प्रभावी रास्ता निकलता है या नहीं।

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