अगर आप होम लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से ही EMI भर रहे हैं, तो आपके लिए खुशखबरी है। आने वाले दिनों में EMI कम हो सकती है, क्योंकि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) रेपो रेट में एक और कटौती कर सकता है। HSBC की ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि दिसंबर की नीतिगत बैठक में RBI 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की कटौती कर सकता है। यह फैसला सीधे-सीधे होम लोन पर असर डाल सकता है।
फिलहाल RBI का रेपो रेट 5.50% पर है। इस साल पहले ही 100 बेसिस पॉइंट की कटौती हो चुकी है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है और महंगाई पर थोड़ी राहत दिखी है। बैंकिंग सेक्टर भी धीरे-धीरे उन कटौतियों को ग्राहकों तक पहुंचा रहा है, और कई बैंक होम लोन की ब्याज दरों में कमी कर चुके हैं। अगर दिसंबर में RBI एक और कटौती करता है और बैंक इसे आगे बढ़ाते हैं, तो होम लोन की EMI और कम हो सकती है।
HSBC की रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई में लगातार गिरावट, खाद्य कीमतों का स्थिर होना और टैक्स-GST में संतुलन बनने से RBI को नीति दरों में ढील देने का मौका मिला है। कम महंगाई का सीधा असर यह है कि बैंकिंग सिस्टम को ब्याज दरें कम करने में ज्यादा जोखिम नहीं दिखता। इसी वजह से यह उम्मीद मजबूत है कि RBI अब विकास को और बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट घटा सकता है।
अगर यह कटौती होती है, तो सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होगा जिनके पास रेपो-लिंक्ड फ्लोटिंग रेट होम लोन है। इन लोन की EMI रेपो रेट बदलते ही अपडेट हो जाती है, इसलिए बैंक कटौती को जल्दी लागू करते हैं। दूसरी तरफ, MCLR या बेस रेट वाले पुराने लोन में बदलाव देर से आता है। ऐसे ग्राहक चाहे तो नए रेपो-लिंक्ड लोन में शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे उन्हें EMI में जल्दी राहत मिल सकती है।
दरों में 0.25% की कमी छोटी लग सकती है, लेकिन लंबी अवधि के होम लोन में इसका असर बड़ा होता है। 20–25 साल की अवधि में यह EMI कम करने के साथ-साथ कुल ब्याज को भी काफी घटा देता है। पिछले कटौतियों से भी ग्राहकों को अच्छी बचत मिली है, और यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि RBI के कटौती करने के बाद भी EMI तभी कम होगी जब बैंक इसे ग्राहकों तक पहुंचाएंगे। हर बैंक की ट्रांसमिशन पॉलिसी अलग होती है—कुछ जल्दी दरें घटाते हैं, कुछ देर से। इसलिए ग्राहकों को अपनी बैंक की पॉलिसी और लोन की शर्तों पर भी ध्यान देना चाहिए।
कुल मिलाकर, दिसंबर की नीति बैठक से घर खरीदने वालों, नए लोन लेने वालों और EMI भर रहे करोड़ों लोगों को राहत मिल सकती है। ब्याज दरों में अनुमानित 25 बेसिस पॉइंट की कटौती हो जाती है, तो यह रियल एस्टेट सेक्टर और होमbuyers दोनों के लिए सकारात्मक माहौल पैदा करेगा।