पश्चिम एशिया में उफान मारते संघर्ष के दौर में अच्छी खबर। अडानी कंपनी द्वारा चलाए जा रहे इजरायल के हाइफा बंदरगाह पर कोई खतरा नहीं। रविवार को अधिकारियों ने बताया कि स्टाफ सब सुरक्षित। सुविधाएँ, उपकरण और गतिविधियाँ पूरी तरह सामान्य। जब इजरायल पर ईरानी रॉकेट बरस रहे, तब यह खबर राहत वाली है।
बयान की पूरी बात
अडानी प्रतिनिधि बोले, “स्थिति पर पैनी नजर। इजरायल ट्रांसपोर्ट विभाग से जुड़कर नियम मान रहे।” उन्होंने कहा, “लोगों की हिफाजत पहली। व्यापार चेन को बरकरार रखेंगे।” आठ नावें किनारे लगीं। सब कुशलमंगल।
यह बंदरगाह इजरायल का अहम केंद्र। 2022 में अडानी पोर्ट्स और गाडोट ने सरकारी नीलामी से हासिल किया। देश का दूसरा विशालकाय पोर्ट। माल लाने-ले जाने का मुख्य रास्ता। ईरान की मार के बीच भी अटल।
जंग का छोटा इतिहास
शनिवार को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर निशाना साधा। राजधानी में विस्फोट। खामेनेई गुजर गए। तेहरान ने पलटवार किया। दर्जनों मिसाइलें। हाइफा इलाके में सावधानी। IRGC ने कड़ी सजा की बात कही। तेल भाव चढ़े।
फिर भी हाइफा डटा। अडानी ने सख्त पहरा बढ़ाया। अभ्यास चले। स्टाफ को पनाह। कामकाज योजनाएँ जोर पर। भारत की ताकत दिखी।
देश पर पडऩा
यह पोर्ट भारत के हित में। तेल रास्ते डगमगाए। हाइफा दूसरा विकल्प। माल ढोने में सहारा। युद्ध से दाम ऊँचे, लेकिन बंदरगाह चलने से फायदा। सरकार ने लोगों की रक्षा का वादा किया। मोदी की CCS चल रही।