राजस्थान के अलवर जिले के एक छोटे से गांव में जनवरी 2026 की सर्द सुबह शादी की तैयारियां चल रही हैं। घर में हलचल है, रिश्तेदार जुट रहे हैं, लेकिन दुल्हन का नाम सुनते ही माहौल भारी हो जाता है। यह कोई आम शादी नहीं है। दुल्हन 34 वर्षीय प्रिया सेठ है वही महिला, जो जयपुर के बहुचर्चित ‘टिंडर सूटकेस मर्डर केस’ में उम्रकैद की सजा काट रही है।
प्रिया सेठ एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि उसे 15 दिन की पैरोल पर शादी करने की अनुमति दी गई है। वह राजस्थान की सांगानेर ओपन जेल में बंद अपने साथी कैदी हनुमान प्रसाद से विवाह करने जा रही है। दोनों की मुलाकात जेल के भीतर हुई, दोस्ती प्यार में बदली और अब यह रिश्ता शादी तक पहुंच गया है। लेकिन यह शादी कई सवाल खड़े कर रही है और उस अपराध की यादें ताजा कर रही है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
टिंडर पर हुई मुलाकात, जो जानलेवा साबित हुई
साल 2018 की शुरुआत में जयपुर के 27 वर्षीय युवक दुश्यंत शर्मा की मुलाकात टिंडर पर प्रिया सेठ से हुई। दुश्यंत एक उभरता हुआ कारोबारी था और सोशल मीडिया पर खुद को आर्थिक रूप से मजबूत दिखाता था। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो कई हफ्तों तक चली। करियर, भविष्य और रिश्तों पर लंबी चर्चाएं होती रहीं। दुश्यंत को लगा कि उसे एक भरोसेमंद साथी मिल गया है।
लेकिन हकीकत कुछ और ही थी
प्रिया सेठ उस समय अपने लिव-इन पार्टनर दिक्षांत कामरा के साथ रह रही थी और दोनों पर करीब 21 लाख रुपये का भारी कर्ज था। पैसों की तंगी से परेशान इस जोड़ी ने जल्दी पैसे कमाने के लिए एक खौफनाक साजिश रची। टिंडर पर अमीर दिखने वाला दुश्यंत उन्हें आसान शिकार नजर आया।
जयपुर के फ्लैट में बिछाया गया जाल
प्रिया ने दुश्यंत को जयपुर के बजाज नगर इलाके में स्थित अपने किराए के फ्लैट पर मिलने के लिए बुलाया। दुश्यंत बिना किसी शक के वहां पहुंच गया। उसे नहीं पता था कि यह मुलाकात उसकी जिंदगी की आखिरी मुलाकात होगी।
जैसे ही वह फ्लैट में दाखिल हुआ, वहां मौजूद प्रिया, दिक्षांत और उनके साथी लक्ष्य वालिया ने उसे काबू में कर लिया। उसे बांधकर बंधक बना लिया गया और उसके परिवार से 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग की गई।
कुछ देर बाद दुश्यंत ने अपने पिता को फोन किया।
“पापा, ये लोग मुझे मार देंगे। प्लीज 10 लाख रुपये दे दीजिए,” वह घबराई आवाज में बोला।
फिरौती नहीं मिली, तो ले ली जान
दुश्यंत का परिवार किसी तरह 3 लाख रुपये ही जुटा सका, जो आरोपियों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। लेकिन यह रकम उनके लिए काफी नहीं थी। उन्हें डर था कि अगर दुश्यंत को छोड़ा गया तो वह पुलिस तक पहुंच सकता है।
यहीं से अपराध ने सबसे खौफनाक मोड़ लिया।
आरोपियों ने दुश्यंत को हमेशा के लिए चुप कराने का फैसला कर लिया। पहले उसका गला घोंटा गया, फिर तकिये से मुंह दबाया गया। जब वह अब भी जिंदा था, तो उस पर चाकू से कई वार किए गए और आखिरकार गला रेत दिया गया।
सूटकेस में बंद लाश, देशभर में सनसनी
हत्या के बाद दुश्यंत के शव को एक सूटकेस में बंद कर दिया गया और जयपुर के बाहरी इलाके के एक गांव में फेंक दिया गया। कुछ दिनों बाद जब ग्रामीणों ने बदबू के चलते सूटकेस खोला, तो अंदर का दृश्य देख हर कोई सन्न रह गया।
यह मामला जल्द ही राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। डेटिंग ऐप्स की सुरक्षा, ऑनलाइन पहचान और डिजिटल युग में बढ़ते अपराधों पर बहस छिड़ गई।
कबूलनामा और उम्रकैद की सजा
पुलिस जांच के दौरान प्रिया सेठ ने अपराध कबूल कर लिया।
उसने कहा, “उसने खुद को अमीर बताया था। हमें पैसों की जरूरत थी। इसलिए हमने अपहरण और हत्या की योजना बनाई।”
साल 2023 में जयपुर की एक अदालत ने प्रिया सेठ, दिक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इसे सुनियोजित, क्रूर और नृशंस हत्या करार दिया।
इसके बाद प्रिया को सांगानेर ओपन जेल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां अच्छे आचरण वाले कैदियों को अपेक्षाकृत खुली व्यवस्था में रखा जाता है।
जेल में हुई मुलाकात, फिर बना रिश्ता
सांगानेर ओपन जेल में प्रिया की मुलाकात हनुमान प्रसाद से हुई, जो खुद भी उम्रकैद की सजा काट रहा है। हनुमान को अलवर में एक व्यक्ति, उसके तीन बेटों और भतीजे की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। यह हत्या कथित तौर पर मृतक की पत्नी के साथ अवैध संबंधों के चलते हुई थी।
दोनों के अतीत खून से सने थे, लेकिन जेल के भीतर उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। बातचीत, सहानुभूति और साथ रहने की आदत धीरे-धीरे प्रेम में बदल गई।
शादी के लिए मिली 15 दिन की पैरोल
इस महीने की शुरुआत में राजस्थान हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को दोनों की पैरोल याचिका पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया। इसके बाद पैरोल समिति ने 15 दिन की अस्थायी रिहाई को मंजूरी दे दी सिर्फ शादी के लिए।
पीड़ित परिवार का दर्द और सवाल
दुश्यंत शर्मा का परिवार इस फैसले से बेहद आहत है। उनका कहना है कि उन्हें न तो पैरोल के बारे में जानकारी दी गई और न ही उनकी राय ली गई। परिवार का कहना है कि जब हत्या के दोषी खुले में आकर शादी जैसे समारोह मना रहे हों, तो न्याय का अर्थ खोखला लगता है। उन्होंने इस पैरोल आदेश को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है।