नेपाल में 5 मार्च 2026 को होने वाले आम चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। ये चुनाव सितंबर 2025 में हुए बड़े जनआंदोलन के बाद हो रहे हैं, जिसमें युवा (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था।
इस बीच, नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की अचानक सक्रियता ने राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। 14 फरवरी को काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर हजारों समर्थक उन्हें स्वागत करने के लिए जुटे, जबकि उस समय निषेधाज्ञा लागू थी। इस भीड़ को राजशाही समर्थकों की ताकत के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
इसके कुछ दिनों बाद, 18 फरवरी को ज्ञानेंद्र शाह ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने भगवान पशुपतिनाथ का आह्वान करते हुए कहा कि देश की मौजूदा समस्याओं का समाधान पहले होना चाहिए, उसके बाद चुनाव कराए जाने चाहिए। उन्होंने नेपाल की स्थिति को “असामान्य संकट” बताया।
आगामी चुनाव में काठमांडू के लोकप्रिय मेयर बालेन शाह भी प्रमुख भूमिका में हैं, जिन्हें खासतौर पर युवा वर्ग का समर्थन प्राप्त है। वे ओली के गढ़ झापा में चुनौती पेश कर रहे हैं।
2025 के आंदोलन की शुरुआत सोशल मीडिया बैन से हुई थी, जो बाद में भ्रष्टाचार, असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया। इन प्रदर्शनों में 70 से अधिक लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
अंतरिम प्रधानमंत्री सीला खाकी के नेतृत्व में सरकार चुनाव की तैयारी कर रही है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये चुनाव “विशेष परिस्थितियों” में कराए जा रहे हैं।