रांची। झारखंड के दो बार मुख्यमंत्री रहे आदिवासी नेता शिबू सोरेन का रविवार को नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। उनके परिवार के सदस्यों ने पुष्टि की कि उन्हें पिछले डेढ़ महीने से किडनी संबंधी गंभीर समस्या थी और वे जून के अंतिम सप्ताह में अस्पताल में भर्ती हुए थे।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर यह दुखद समाचार साझा करते हुए लिखा: “मेरे पिता, मेरे मार्गदर्शक — आदरणीय शिबू सोरेन जी का निधन हो गया। उनकी कमी कभी पूरी नहीं होगी।”
कौन थे शिबू सोरेन
शिबू सोरेन का जन्म 3 जनवरी 1944 को हुआ था। वे आदिवासी आंदोलन के प्रमुख नेता थे और 1970-80 के दशक से पॉलिटिक्स से जुड़े हुए थे। उन्होंने 1985 में बिहार विधान परिषद सदस्य का कार्यकाल भी निभाया झारखंड के गठन के बाद वे दो बार मुख्यमंत्री रहे—2005–2006 और 2008–2009। उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आदिवासी अधिकारों और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के लिए बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया। वे पहली पीढ़ी के आदिवासी नेता थे, जिन्हें आदिवासी समाज में गहरी स्वीकार्यता और सम्मान मिला
अस्पताल में इलाज और निधन की स्थिति
शिवू सोरेन को जून के अंतिम सप्ताह में अस्पताल में भर्ती किया गया था। किडनी की गड़बड़ी और इससे जुड़े अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं से वे लगातार संघर्षरत रहे। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अस्पताल में तीन बार डायलिसिस ट्रीटमेंट लिया, लेकिन उनकी हालत स्थिर नहीं हो पाई। रविवार सुबह परिवार के लोग उनके पास मौजूद थे, और उन्होंने अंतिम सांस सर गंगाराम अस्पताल में ली।
नेताओं से संवेदना भाव
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि शिबू सोरेन ने आदिवासी समाज के साथ पूरे देश को प्रेरित किया।
- कांग्रेस प्रमुख प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि उनके साथ भारत की आदिवासी राजनीति का एक युग चला गया।
- झारखंड के विभिन्न राजनीतिक दलों सहित लोगों ने सोशल मीडिया पर संवेदना व्यक्त की और कहा कि उनका जाना देश और आदिवासी समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
पारिवारिक जानकारी और रहा उनके पीछे
शिबू सोरेन दो बार विवाह कर चुके थे। उनकी पहली पत्नी मीना सोरेन का निधन पहले ही हो चुका है। उनकी दूसरी पत्नी कैरोलिना सोरेन और पुत्र हेमंत सोरेन (जो वर्तमान मुख्यमंत्री हैं) जीवित हैं। वे चार पुत्र-पुत्रियों में से एक थे, और भारतीय राजनीति में आदिवासी नेतृत्व की धारा शुरु की। उनके अलावा परिवार में कई लोग JMM पॉलिटिक्स में सक्रिय हैं।
उनकी विरासत: आदिवासी राजनीति और आंदोलन
- झारखंड मुक्ति आंदोलन में उनका नेतृत्वर विफलरण मूल पूंजी साबित हुआ
- आदिवासी अधिकार, भूमि संरक्षण, शिक्षा अधिकार और संस्कृति के लिए JMM ने मजबूत संघर्ष किया
- आदिवासी समुदाय में उनका “लोकतंत्र के लिए जन शक्तिकरण” का संदेश गहरा असर छोड़ गया
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री दफ्तर से जारी बयान में Hemanth Soren ने कहा: “पिताजी ने जीवन भर आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ी और झारखंड को आजादी के बाद एक पहचान दी। उनकी कमी बहुत गहरी है।” उन्होंने सार्वजनिक तौर पर 3 दिनों का राजकीय शोक घोषित करने की जानकारी दी और उन्हीं के नाम पर राहुल सोरेन की एक इवेंट में मोदीजी ने उनके सम्मान में ‘राष्ट्रीय आदिवासी गौरव दिवस’ मनाने की बात कही।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
- आदिवासी राजनीति और JMM नेतृत्व में शिबू सोरेन की अनुपस्थिति अब एक बड़ा राजनीतिक फ़र्क पैदा कर सकती है
- नई पीढ़ी, जैसे Hemanth Soren और बाउल बसंत सोरेन को अब राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ाना होगा
- आदिवासी राजनीति की दिशा में यह बदलाव नए रणनीतिक समीकरण बनाएगा
- सांस्कृतिक आंदोलन और आदिवासी पहचान भारतीय राजनीति की अगली चुनौतियों में शामिल रहेगी