विन न्यूज़ नेटवर्क। केरल की राजनीति में एक अनोखा और अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला, जब हिरासत में बंद एक निर्वाचित भाजपा पार्षद ने केंद्रीय जेल के भीतर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। तिरुअनंतपुरम नगर निगम के वाझोट्टुकोणम वार्ड से चुने गए सुगाथन आर. ने हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद यह शपथ ग्रहण किया।
यह शपथ समारोह मंगलवार को त्रिशूर स्थित विय्यूर केंद्रीय जेल के पुस्तकालय में आयोजित किया गया, जहां तिरुअनंतपुरम के महापौर वीवी राजेश भी मौजूद रहे।
हाई कोर्ट की अनुमति के बाद बनी राह
सुगाथन आर. के खिलाफ केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी कापा के तहत कार्रवाई की गई थी और वे फिलहाल हिरासत में हैं। चूंकि वे निर्वाचित पार्षद हैं, इसलिए उनके शपथ ग्रहण को लेकर कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। केरल हाई कोर्ट ने विशेष अनुमति देते हुए जेल परिसर में शपथ ग्रहण कराने की इजाजत दी, जिसके बाद प्रशासन ने आवश्यक व्यवस्था की।
ईश्वर के नाम पर ली शपथ
जेल के पुस्तकालय में आयोजित संक्षिप्त समारोह में सुगाथन आर. ने ईश्वर के नाम पर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। महापौर वीवी राजेश ने उन्हें विधिवत शपथ दिलाई और कहा कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया है।

उन्होंने बताया कि शपथ ग्रहण की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रारूप के अनुसार संपन्न कराई गई।
वार्ड के काम महापौर कार्यालय संभालेगा
शपथ के बाद महापौर वीवी राजेश ने कहा कि यदि हिरासत में होने के कारण सुगाथन आर. अपने पार्षद पद के दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पाते हैं, तो उनके वार्ड से जुड़े प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी महापौर कार्यालय संभालेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निगम की सेवाएं प्रभावित नहीं होने दी जाएंगी और वार्ड के नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रहेंगी।
एलडीएफ ने किया विरोध प्रदर्शन
इस घटनाक्रम का वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने विरोध किया। एलडीएफ कार्यकर्ताओं ने तिरुअनंतपुरम नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए जेल में शपथ ग्रहण कराए जाने पर सवाल उठाए। विपक्षी दलों का कहना है कि इस मामले पर व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस होनी चाहिए।
20 भाजपा पार्षदों को फिर से शपथ लेने का आदेश
पिछले महीने केरल हाई कोर्ट ने तिरुअनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों को दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि पहले दिलाई गई शपथ निर्धारित कानूनी प्रारूप के अनुरूप नहीं थी। इसी आदेश के तहत पुनः शपथ ग्रहण की प्रक्रिया चल रही थी और उसी क्रम में सुगाथन आर. को भी दोबारा शपथ दिलाई गई।
राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से अहम
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मामला केवल एक शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं से भी जुड़ा हुआ है। केरल में पहली बार किसी हिरासत में बंद पार्षद को जेल परिसर में शपथ दिलाए जाने से यह मामला राज्य की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।