वेनजुएला रैड के बाद नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना माचाडो ने ट्रंप को पुरस्कार समर्पित करने की पेशकश की

Vin News Network
Vin News Network
6 Min Read
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो ने 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित करने की पेशकश की

वेनजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार समर्पित करने की इच्छा व्यक्त की है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब माचाडो को निकोलस मादुरो की गिरफ़्तारी के बाद अमेरिका की रणनीति में शामिल नहीं किया गया।

माचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार उनके लोकतंत्र विरोधी शासन के खिलाफ संघर्ष और देश में तानाशाही के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दिया गया। उन्होंने सोमवार रात Fox News को दिए इंटरव्यू में कहा कि जैसे ही उन्हें पुरस्कार की घोषणा हुई, उन्होंने इसे ट्रंप को समर्पित करने का मन बना लिया।

माचाडो ने कहा, “जैसे ही मुझे पता चला कि हमें नोबेल शांति पुरस्कार मिला है, मैंने इसे राष्ट्रपति ट्रंप को समर्पित किया। मैं मानती हूँ कि उन्होंने यह उपलब्धि हासिल करने का हकदार हैं। 3 जनवरी की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने दुनिया को दिखा दिया कि न्याय ने अत्याचार पर जीत हासिल की। यह सिर्फ वेनेजुएला के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से उन्हें बताना चाहती हूँ कि हम, वेनेजुएला के लोग, निश्चित रूप से यह पुरस्कार उन्हें देना चाहते हैं और इसे उनके साथ साझा करना चाहते हैं।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने पुरस्कार जीतने के बाद ट्रंप से बात की है, तो माचाडो ने जवाब दिया, “असल में, मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से 10 अक्टूबर को बात की थी, उसी दिन जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा हुई थी, लेकिन उसके बाद से नहीं।”

3 जनवरी की रात अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में मादुरो को गिरफ़्तार किए जाने के बाद माचाडो ने कहा, “स्वतंत्रता का समय आ गया है।” इस बयान ने विपक्षी दलों और नागरिकों में उम्मीदें जगा दी कि वेनेजुएला में तेल-समृद्ध राष्ट्र पर दशकों से चले आ रहे दमन के बाद विपक्ष की सरकार बन सकती है।

हालांकि, ये उम्मीदें तब कुछ कम हो गईं जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से माचाडो से दूरी बनाई। ट्रंप ने कहा कि माचाडो को देश में पर्याप्त समर्थन या सम्मान नहीं प्राप्त है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मुझे लगता है कि उनके लिए देश का नेतृत्व करना बहुत कठिन होगा। उन्हें देश में समर्थन या सम्मान नहीं मिला है। वह एक बहुत अच्छी महिला हैं, लेकिन उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला।”

माचाडो पिछले महीने वेनेजुएला छोड़कर नोर्वे गई थीं ताकि नोबेल पुरस्कार स्वीकार कर सकें। तब से वह देश वापस नहीं लौटी हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपने देश लौटने की योजना बना रही हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि माचाडो का ट्रंप को पुरस्कार समर्पित करने का प्रस्ताव न केवल राजनीतिक तौर पर बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह अमेरिकी और वेनेजुएला के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव की झलक देता है।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं के लिए यह असामान्य नहीं है कि वे अपने पुरस्कार को दूसरों के योगदान या उनके प्रयासों के सम्मान में समर्पित करें। माचाडो के इस कदम ने ट्रंप के उस अमेरिकी अभियान को मान्यता दी है, जिसने मादुरो को सत्ता से हटाने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, माचाडो की यह पेशकश यह भी दर्शाती है कि वेनेजुएला में विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच रणनीतिक गठजोड़ की संभावना बढ़ रही है। हालांकि, ट्रंप ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और माचाडो भी सीधे संवाद की पुष्टि नहीं करती दिख रही हैं।

इसके अलावा, माचाडो ने अपने इंटरव्यू में भावनात्मक रूप से कहा कि यह पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि वेनेजुएला में लोकतंत्र की जीत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि उनके लिए यह पुरस्कार जनता के संघर्ष और न्याय की दिशा में उठाए गए कदम का सम्मान है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माचाडो की इस घोषणा ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस कदम से वेनेजुएला में लोकतंत्र समर्थक आवाज़ों को नई पहचान मिलेगी, जबकि ट्रंप की भूमिका को वैश्विक राजनीति में फिर से उजागर किया जाएगा।

संक्षेप में, माचाडो का यह कदम वेनेजुएला में लोकतंत्र और न्याय के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। नोबेल पुरस्कार को ट्रंप के नाम समर्पित करने का उनका प्रस्ताव न केवल विवादास्पद है, बल्कि राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बीच, देश और अंतरराष्ट्रीय मीडिया इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *