विन न्यूज़ नेटवर्क। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक रूप से त्वरित फैसला सुनाते हुए आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा दी है। अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए यह सख्त दंड सुनाया।
इस मामले में सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि घटना के केवल 40 दिनों के भीतर मुकदमे का निस्तारण कर दिया गया।
30 मई को हुई थी दर्दनाक वारदात
यह घटना 30 मई को फिरोजाबाद के शिकोहाबाद क्षेत्र की यादव कॉलोनी में हुई थी। आरोप है कि बदायूं निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने डेढ़ साल के मासूम आरव को सड़क पर पटक-पटक कर उसकी हत्या कर दी थी।
घटना सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था और स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। इस जघन्य वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।
पुलिस ने 6 दिन में दाखिल की चार्जशीट
मामले की जांच में पुलिस ने असाधारण तेजी दिखाई। शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी के अनुसार, घटना के महज छह दिन के भीतर आरोपी के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी गई थी। त्वरित जांच और मजबूत साक्ष्यों के कारण मुकदमे की सुनवाई भी तेजी से आगे बढ़ी।
13 गवाहों ने रखा अभियोजन पक्ष का पक्ष
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 13 गवाह पेश किए। इन गवाहों ने घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों की पुष्टि की। वहीं बचाव पक्ष की ओर से केवल एक गवाह प्रस्तुत किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना।
भारी सुरक्षा के बीच पेश हुआ आरोपी
गुरुवार को अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया था। इसके बाद शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे आरोपी को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया गया। सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे।
सजा सुनते ही खुद को मारने लगा थप्पड़
शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि जब अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई तो आरोपी अदालत कक्ष में ही खुद को थप्पड़ मारने लगा। उन्होंने कहा कि यह मामला अत्यंत जघन्य प्रकृति का था और अदालत ने सभी तथ्यों पर गंभीरता से विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया।
तेज जांच और प्रभावी पैरवी की चर्चा
इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष की त्वरित कार्रवाई की व्यापक चर्चा हो रही है। कम समय में जांच पूरी कर अदालत के सामने मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिसके चलते मामले का निस्तारण रिकॉर्ड समय में संभव हो सका। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला गंभीर अपराधों में तेज न्याय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाएगा।
परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद
मासूम आरव की हत्या के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश था। अदालत के फैसले के बाद परिजनों ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद थी। फिलहाल अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी को मृत्युदंड दिया गया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया उच्च न्यायालय में पुष्टि के बाद पूरी होगी।