अमेरिका की नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति पर कांग्रेस का हमला, कहा— पाकिस्तान पर नरमी मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता

Vin News Network
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अमेरिका की नई सुरक्षा रणनीति में पाकिस्तान पर नरमी को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला।

अमेरिका द्वारा जारी की गई नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी (NSS) 2025 ने भारत की घरेलू राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस पार्टी ने इस दस्तावेज़ के आधार पर केंद्र की मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि वाशिंगटन की नई नीति में पाकिस्तान को लेकर दिख रही “नरमी” भारत की कूटनीतिक सफलता की कथित कहानी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

व्हाइट हाउस द्वारा नई रणनीति जारी किए जाने के बाद कांग्रेस ने शनिवार को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि इस दस्तावेज़ में पाकिस्तान के प्रति अमेरिका का रवैया पहले की तुलना में स्पष्ट रूप से बदला है। पार्टी का कहना है कि 2017 की अमेरिकी रणनीति के मुकाबले इस बार पाकिस्तान के प्रति प्रत्यक्ष आलोचना लगभग नदारद है, जबकि ट्रंप प्रशासन के दौरान जारी रणनीति में इस्लामाबाद पर आतंकियों को आश्रय देने और अमेरिका के साझेदार देशों पर हमलों को समर्थन देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

कांग्रेस का आरोप नई रणनीति में पाकिस्तान पर दिखी “नरमी”
कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि नई 33 पन्नों की रणनीति पाकिस्तान पर अमेरिका के रुख में “स्पष्ट बदलाव” को दर्शाती है। रमेश के अनुसार, 2017 के दस्तावेज़ में पाकिस्तान पर कड़े शब्दों में आरोप लगाए गए थे और उससे आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम, साथ ही उसके परमाणु कार्यक्रम में अधिक जवाबदेही की मांग भी की गई थी।
लेकिन 2025 संस्करण में इन आरोपों की तीव्रता घटती हुई दिखती है, जिसे कांग्रेस भारत के लिए एक कूटनीतिक झटका मान रही है।

रमेश ने कहा,
“2025 की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी यह संकेत देती है कि अमेरिका अब पाकिस्तान को लेकर अपने रुख में नरमी ला रहा है। यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है और भारत के हितों के लिए चिंता का विषय है।”

ट्रंप के पुराने बयान का संदर्भ भी शामिल
नई रणनीति में अमेरिका ने एक बार फिर यह दोहराया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मुद्दों का समाधान शांति और बातचीत के माध्यम से होना चाहिए। यह वही रुख है जिसे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार व्यक्त कर चुके थे।
कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रकार के उल्लेख से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह संदेश जाता है कि अमेरिका दक्षिण एशिया में विवादों पर अपनी “संतुलनकारी भूमिका” बनाए रखना चाहता है, जिसमें पाकिस्तान पर दबाव कम करने का संकेत भी छिपा हो सकता है।

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