चीन और रूस ने रूस में तीसरी संयुक्त एंटी-मिसाइल ड्रिल्स आयोजित की है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। चीनी रक्षा मंत्रालय ने शनिवार, 7 दिसंबर 2025 को इसकी जानकारी दी। डिफेंस मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, यह अभ्यास किसी तीसरे देश को निशाना बनाने या किसी वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति के जवाब में नहीं किया गया। दोनों देशों ने इसे सिर्फ सुरक्षा और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन और रूस के बीच इस तरह के संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के रणनीतिक तालमेल को दिखाते हैं। हाल के वर्षों में अमेरिका और उसके सहयोगियों की मिसाइल रक्षा योजनाओं के चलते दोनों देशों ने अपनी सैन्य तैयारियों और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
इन ड्रिल्स में मुख्य रूप से एंटी-मिसाइल सिस्टम की कार्यकुशलता और सुरक्षा रणनीतियों का परीक्षण किया गया। दोनों देशों के सैनिकों ने परस्पर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया। इससे यह संकेत मिलता है कि चीन और रूस संभावित खतरों के प्रति अपने सुरक्षा नेटवर्क को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन और रूस के बीच सैन्य और रक्षा सहयोग पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ा है। दोनों देश सैन्य अभ्यास, हथियार प्रणाली के परीक्षण और रणनीतिक योजना में आपसी सहयोग को महत्व देते हैं। इस तरह के अभ्यास यह भी दिखाते हैं कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ये अभ्यास अमेरिका और उसके सहयोगियों की मिसाइल क्षमताओं को देखते हुए सुरक्षा संतुलन बनाए रखने का प्रयास हैं। चीन और रूस दोनों ही यह संदेश देना चाहते हैं कि वे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों में संयुक्त रूप से सक्रिय हैं।
हालांकि चीन और रूस ने साफ किया है कि यह अभ्यास किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है, फिर भी यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन सकता है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के सुरक्षा विश्लेषकों ने इस कदम को सावधानी से देखा है। उनका मानना है कि इस तरह के अभ्यास रणनीतिक संतुलन और वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकते हैं। चीन और रूस दोनों ही अक्सर अपने सैन्य अभ्यास को रक्षा और परामर्श उद्देश्यों तक सीमित बताते हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय तनाव न बढ़े। इस बार भी दोनों देशों ने इसे सामान्य सुरक्षा अभ्यास के रूप में पेश किया है।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह तीसरी संयुक्त ड्रिल दोनों देशों के लिए तकनीकी और रणनीतिक अनुभव बढ़ाने का मौका है। इससे सैनिकों के बीच तालमेल मजबूत होता है और मिसाइल रक्षात्मक क्षमताओं में सुधार होता है।
इसके अलावा, यह अभ्यास दोनों देशों के लिए राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है। यह दिखाता है कि चीन और रूस अपने सुरक्षा हितों को लेकर एक-दूसरे के साथ स्थिर और सहयोगी हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, भविष्य में चीन और रूस इस तरह के अभ्यास को अधिक नियमित रूप से कर सकते हैं। इससे दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं में वृद्धि होगी और आपसी सहयोग को नई दिशा मिलेगी। इसके अलावा, यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चर्चाओं में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
तीसरी संयुक्त एंटी-मिसाइल ड्रिल से यह साफ होता है कि चीन और रूस की रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है। यह अभ्यास न केवल उनके सैन्य सहयोग को बढ़ाता है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर उनकी सक्रिय भागीदारी को भी दर्शाता है। दोनों देश स्पष्ट कर चुके हैं कि यह किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है, फिर भी यह अभ्यास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा संतुलन पर असर डाल सकता है।
चीन और रूस के बीच यह सहयोग आने वाले वर्षों में और गहरा हो सकता है, जिससे दोनों देशों की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी। यह अभ्यास केवल तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है कि दोनों देश मिलकर वैश्विक सुरक्षा और अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं।