विन न्यूज़ नेटवर्क। देश में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर बांग्लादेश जैसी स्थिति के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया था। इसके बाद बीजेपी के कई नेताओं ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए। वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर पलटवार किया है।
कपिल सिब्बल बोले- जनता चाहती है सत्ता परिवर्तन
कपिल सिब्बल ने शनिवार को राजनाथ सिंह के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन कांग्रेस नहीं, बल्कि जनता चाहती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों, संस्थाओं की भूमिका और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए। सिब्बल ने कहा कि अब सरकार के जाने का समय आ गया है।
सिब्बल ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया। उनका कहना है कि यदि जनता सरकार की नीतियों से असहमत है, तो उसे अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े कुछ मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी होने के कारण उन्होंने अदालत के विचाराधीन विषयों पर टिप्पणी करने से परहेज किया।
पवन खेड़ा ने बताया विपक्ष का उद्देश्य
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी ‘रिजीम चेंज’ को लेकर बीजेपी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार की नीतियों का विरोध करना और जनता के मुद्दे उठाना है। खेड़ा के मुताबिक, कांग्रेस का उद्देश्य चुनाव के माध्यम से सरकार बदलना है, न कि अराजकता फैलाना।
उन्होंने सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए विभिन्न संस्थानों में संघ के कथित प्रभाव का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस का कहना है कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
राजनाथ सिंह ने लगाए थे गंभीर आरोप
विवाद की शुरुआत 16 अक्टूबर को लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान के बाद हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राजनीतिक टकराव बढ़ाने और अराजकता फैलाने के लिए कर रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा था कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है और किसी को भी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने या अव्यवस्था फैलाने का अधिकार नहीं है।
बीजेपी नेताओं ने भी विपक्ष को घेरा
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सुधांशु त्रिवेदी ने ‘रिजीम चेंज’ की भाषा को लेकर सवाल उठाए और प्रदर्शन के उद्देश्य पर आपत्ति जताई।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा कि भारत में संविधान के तहत सत्ता परिवर्तन चुनाव के माध्यम से ही होना चाहिए। इस पूरे विवाद में बीजेपी जहां विपक्ष के बयानों को अराजकता से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने की मांग बता रही है।
लोकतांत्रिक अधिकार बनाम अराजकता की बहस
‘रिजीम चेंज’ को लेकर जारी यह विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक अधिकारों, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर बहस का रूप ले चुका है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के सामने हैं। ऐसे में इस विवाद का केंद्र यही सवाल है कि सरकार के खिलाफ विरोध और सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक दायरे में किस तरह देखा जाए।