बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और विपक्षी दल लगातार सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार सहित बीजेपी शासित राज्यों की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए नफरत की राजनीति को बढ़ावा दे रही हैं, जबकि सुरक्षा और न्याय जैसे अहम विषयों पर अपेक्षित परिणाम नहीं दिखाई दे रहे हैं।
शादाब चौहान ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में एनकाउंटर को न्याय का विकल्प नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस पर हथियार उठाने की स्थिति में पहुंच रहा है तो यह भी जांच का विषय है कि समाज में कानून का भय क्यों कम हो रहा है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि कहीं अपराधियों को किसी प्रकार का संरक्षण तो नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
दरअसल, भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत तिवारी नामक युवक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित तौर पर पुलिस के सामने हथियार लहराते हुए दिखाई दे रहा था। पुलिस के अनुसार, 17 जून को भरत तिवारी ने कई राउंड फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। इसी कार्रवाई के दौरान उसे गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना के बाद पुलिस ने घायल युवक को इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसकी हालत गंभीर होने पर पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।
भरत तिवारी की मौत के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। उनका दावा है कि इसके बावजूद उसे गोली मारी गई, इसलिए पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए।
बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता चल सकेगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इसे मानवाधिकार और कानून-व्यवस्था से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि प्रशासन का दावा है कि पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। अब सभी की निगाहें न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने आ सकेगी।