पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 144 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। पार्टी ने इस बार चुनावी रणनीति को स्पष्ट करते हुए मुकाबले को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच केंद्रित करने का प्रयास किया है। बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर सीट से मैदान में उतारा है, जो ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। इसके साथ ही शुभेंदु अधिकारी अपनी मौजूदा सीट नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ेंगे, जिससे यह मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है।
बीजेपी ने इस बार अपने मौजूदा विधायकों पर भी भरोसा जताया है। पार्टी ने 41 वर्तमान विधायकों और 3 पूर्व विधायकों को दोबारा टिकट दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी बड़े बदलाव के बजाय अपने मौजूदा राजनीतिक ढांचे को मजबूत बनाए रखना चाहती है। पार्टी ने विभिन्न सामाजिक और पेशेवर पृष्ठभूमि से उम्मीदवारों को शामिल कर अपनी सामाजिक पकड़ को और व्यापक बनाने की कोशिश की है।
इस सूची की खास बात यह है कि बीजेपी ने महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता दी है। पार्टी ने 11 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है, वहीं 40 वर्ष से कम आयु के 36 उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। इसके अलावा 41 से 55 वर्ष आयु वर्ग के 72 और 56 से 70 वर्ष आयु वर्ग के 32 उम्मीदवारों को भी मौका दिया गया है। चार उम्मीदवार 70 वर्ष से अधिक आयु के हैं।
बीजेपी ने पेशेवर विविधता पर भी ध्यान दिया है। उम्मीदवारों में शिक्षकों, वकीलों, डॉक्टरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व सैनिकों को शामिल किया गया है। सबसे अधिक 23 शिक्षक उम्मीदवार बनाए गए हैं। इसके अलावा 8 सामाजिक कार्यकर्ता, 6 वकील, 5 डॉक्टर, 3 पत्रकार, 3 आध्यात्मिक नेता और 3 सेवानिवृत्त सैनिक भी सूची में शामिल हैं। खास बात यह है कि पार्टी ने एक क्रिकेटर, एक लोक गायक और एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी को भी टिकट दिया है।
नंदीग्राम और भवानीपुर सीटों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नंदीग्राम वही क्षेत्र है, जहां 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन हुआ था, जिसने ममता बनर्जी के राजनीतिक उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं, 2021 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने इसी सीट पर ममता बनर्जी को कड़े मुकाबले में हराया था। भवानीपुर सीट भी ममता का मजबूत गढ़ मानी जाती है, जहां से उन्होंने पिछले उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी।
इन सभी रणनीतिक फैसलों के साथ बीजेपी ने साफ संकेत दे दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में इस बार आक्रामक चुनावी मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति चुनावी नतीजों में कितना असर डालती है और क्या बीजेपी राज्य में सत्ता की ओर निर्णायक कदम बढ़ा पाती है।