साल में 90 दिन काम पर आधारित: केंद्र ने गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के लिए नया सोशल सिक्योरिटी ड्राफ्ट तैयार किया

Vin News Network
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केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों को 90 दिन की न्यूनतम सक्रियता के बाद सामाजिक सुरक्षा लाभ देने के लिए नया ड्राफ्ट जारी किया।

केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के लिए नए नियमों का मसौदा तैयार किया है। इन नियमों का उद्देश्य उन कर्मचारियों को कल्याण लाभ देना है जो किसी प्लेटफॉर्म पर न्यूनतम समय तक काम कर चुके हों। यह कदम गिग वर्कर्स के श्रेणीकरण और उनके अधिकारों को लेकर बड़ी बदलाव की दिशा में माना जा रहा है।

ड्राफ्ट के अनुसार, यदि कोई गिग या प्लेटफॉर्म वर्कर कम से कम 90 दिन सक्रिय रूप से किसी प्लेटफॉर्म पर काम करता है, तो वह सोशल सिक्योरिटी लाभों के लिए पात्र होगा। वहीं, जो कर्मचारी एक से अधिक प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे हैं, उनके लिए पात्रता सीमा 120 दिन तय की गई है। सरकार ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया है।

प्लेटफॉर्म पर कार्यकाल की गणना
ड्राफ्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी प्लेटफॉर्म पर कार्यरत वर्कर को उस दिन से सक्रिय माना जाएगा जब उसने प्लेटफॉर्म के माध्यम से कमाई शुरू की। यदि कोई कर्मचारी किसी दिन एक से अधिक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहता है, तो प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर सक्रियता को अलग-अलग कार्य दिवस के रूप में गिना जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कर्मचारी एक दिन में तीन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है, तो इसे तीन कार्य दिवस माना जाएगा।

कर्मचारी के रूप में वर्गीकरण और लाभ
नई व्यवस्था में, प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कर्मचारी चाहे सीधे प्लेटफॉर्म से जुड़े हों या किसी थर्ड पार्टी एजेंसी के माध्यम से, उन्हें कर्मचारी के रूप में माना जाएगा ताकि वे सोशल सिक्योरिटी कवरेज का लाभ उठा सकें।

ड्राफ्ट के अनुसार पात्र गिग वर्कर्स को स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत भी पंजीकृत किया जाएगा, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।

सदस्यता और मजदूरी विवाद
यह कदम ऐसे समय आया है जब गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म यूनियनों ने कंपनियों और सरकार पर मजदूरी, कामकाजी शर्तों और कल्याण लाभों को लेकर दबाव बढ़ा रखा है। कई यूनियनों ने 31 दिसंबर को राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

गिग और प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने दावा किया कि 22 शहरों से एक लाख से अधिक कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हुए। इसमें दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरी केंद्रों से लगभग 14,000 सदस्य शामिल थे।

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने कहा कि इस हड़ताल का उनके संचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। स्विगी, जोमैटो और मैजिकपिन ने नए साल की पूर्व संध्या पर मजबूत ऑर्डर वॉल्यूम की सूचना दी, और कंपनियों ने कहा कि सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं।

जमैटो और ब्लिंकिट के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि प्लेटफॉर्म ने एक दिन में 75 लाख से अधिक ऑर्डर पूरे किए, जो अब तक का रिकॉर्ड है। मैजिकपिन के सीईओ अंशू शर्मा ने भी कहा कि हड़ताल का उनके प्लेटफॉर्म पर कोई असर नहीं पड़ा।

भारत में गिग वर्कर्स का आकार और भविष्य
सरकारी अनुमान के अनुसार, भारत में वर्तमान में 12.7 मिलियन से अधिक गिग वर्कर्स हैं। वहीं, नीति आयोग ने अनुमान लगाया है कि 2029–30 तक गिग वर्कर्स की संख्या 23.5 मिलियन तक बढ़ सकती है।

यह नई पहल गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सुरक्षा, स्थिरता और सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कर्मचारी भी पारंपरिक कर्मचारियों की तरह समान अधिकार और लाभ पा सकें।

इस ड्राफ्ट के सार्वजनिक समीक्षा में सुझाव मिलने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए वास्तविक सुरक्षा और कल्याण प्रणाली तैयार हो सके।

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