बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल हुई पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके करीबी वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आज अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण अपना अहम फैसला सुनाने जा रहा है। यह मामला मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़ा है, जिनमें बड़े पैमाने पर हत्याओं, अत्याचार और हिंसा के आदेश देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
फैसले से पहले ही पूरे देश में तनाव का माहौल है। सुरक्षा एजेंसियों को हाई-अलर्ट पर रखा गया है फिर भी कई क्षेत्रों से हिंसा और झड़पों की खबरें मिल रही हैं। अभियोजन पक्ष ने हसीना को इस हिंसा का मास्टरमाइंड बताते हुए फांसी की सज़ा की मांग की है, जबकि अवामी लीग इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई कह रही है।
हसीना के खिलाफ मुख्य पांच आरोप
- नागरिकों पर अत्याचार और हत्याओं को रोकने में विफलता
न्यायाधिकरण में दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, हसीना और उनके शीर्ष सहयोगियों पर हत्या, हत्या के प्रयास, यातना और गैर-मानवीय बर्ताव के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
दावा किया गया है कि 14 जुलाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सरकारी संस्थानों और सुरक्षा बलों ने उनके संकेत पर नागरिकों के खिलाफ हिंसक कदम उठाए। - प्रदर्शनकारियों पर हेलीकॉप्टर, ड्रोन और घातक हथियारों से हमले का आदेश
अभियोजन पक्ष का कहना है कि छात्र प्रदर्शनों को दबाने के लिए हसीना ने उन्नत हथियारों और हवाई निगरानी/हमलों की अनुमति दी।
पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां और तत्कालीन आईजीपी मामून पर इस कार्रवाई को लागू करवाने का आरोप लगाया गया है। - रंगपुर में छात्र अबू सईद की हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका
बेगम रोकैया विश्वविद्यालय के पास अबू सईद नामक छात्र की मौत को भी आरोपों में शामिल किया गया है।
हसीना पर भड़काऊ बयान देने और सुरक्षा बलों को घातक कार्रवाई के आदेश देने का आरोप है। - ढाका के चंखरपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या
5. अगस्त की घटना को अभियोजन पक्ष ने सुनियोजित हिंसा करार दिया है। दावा है कि सरकारी आदेश, उकसावे और साजिश के तहत निहत्थे युवाओं को गोली मारी गई।
- अशुलिया में छह छात्रों की हत्या और शव जलाने का आरोप
सबसे भयावह आरोपों में अशुलिया में छह छात्रों की हत्या का मामला शामिल है।
आरोप है कि पांच छात्रों को मारने के बाद जलाया गया और एक को जिंदा रहते हुए आग लगाई गई।
फैसले के बाद क्या हो सकता है?
फैसला टीवी चैनलों पर लाइव प्रसारित किया जा सकता है हालांकि यह न्यायाधिकरण की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
गृह सलाहकार जहांगीर आलम के अनुसार, सरकार फैसले पर तुरंत अमल करेगी।
यदि हसीना दोषी करार दी जाती हैं, तो वे अपील तभी कर पाएंगी जब वे गिरफ्तार हों या खुद को सरेंडर करें।
कानून के मुताबिक
फैसला आने के 30 दिनों के भीतर अपील दायर करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट को अपील मिलने के 60 दिनों के भीतर निर्णय देना आवश्यक है।
आगे का राजनीतिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सजा कड़ी आती है, तो बांग्लादेश की राजनीति लंबे समय तक अस्थिर रह सकती है। विपक्ष इसे दमनकारी कार्रवाई बताएगा, जबकि सरकार फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताकर आगे बढ़ेगी।