वैश्विक संकट के बीच S&P को भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा, GDP अनुमान बढ़ाया

Vin News Network
Vin News Network
4 Min Read
वैश्विक संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट के बावजूद अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी S&P Global ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर आशावादी रुख अपनाया है। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 40 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही FY28 के लिए 7.2 प्रतिशत और FY29 के लिए लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान जताया गया है।

यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों की आर्थिक वृद्धि पर खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद S&P का मानना है कि भारत की घरेलू आर्थिक मजबूती उसे इन बाहरी झटकों से बचाए रखेगी।

दिलचस्प बात यह है कि S&P का अनुमान अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अलग है। उदाहरण के लिए Goldman Sachs ने हाल ही में भारत की GDP वृद्धि का अनुमान घटाकर 5.9 प्रतिशत कर दिया है, जो युद्ध से पहले लगभग 7 प्रतिशत था। निवेश बैंक का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति में बाधा के कारण महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है। उसने 2026 के लिए भारत की महंगाई दर का अनुमान भी बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया है।

S&P के आशावाद के 3 प्रमुख कारण

मजबूत निजी खपत (Private Consumption)
भारत में घरेलू मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। बढ़ती आय, शहरीकरण और मध्यम वर्ग के विस्तार के कारण उपभोग में स्थिर वृद्धि हो रही है। यही घरेलू खर्च भारत की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने वाला सबसे बड़ा स्तंभ माना जा रहा है।

मजबूत निर्यात (Solid Exports)
सेवाओं के निर्यात, खासकर आईटी और डिजिटल सेवाओं, ने भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखा है। माल निर्यात पर दबाव के बावजूद सेवाओं का अधिशेष देश के चालू खाते के घाटे को संतुलित करने में मदद कर सकता है।

निजी निवेश में सुधार (Recovery in Private Investment)
S&P का मानना है कि निजी क्षेत्र का निवेश धीरे-धीरे बढ़ रहा है। बुनियादी ढांचा, विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्रों में निवेश से आने वाले वर्षों में विकास को गति मिल सकती है।

जोखिम भी बरकरार

हालांकि एजेंसी ने चेतावनी भी दी है कि वैश्विक संघर्ष, व्यापार अस्थिरता और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए चुनौती बने रहेंगे। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें व्यापार घाटे को बढ़ा सकती हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

फिर भी S&P का मानना है कि सेवाओं के निर्यात से होने वाला अधिशेष चालू खाते के घाटे को नियंत्रित रखने में मदद करेगा। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया कि भारत का केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है और तटस्थ रुख बनाए रखेगा, हालांकि वर्ष की दूसरी छमाही में 25 बेसिस पॉइंट की एक छोटी दर वृद्धि संभव है।

S&P का अनुमान बताता है कि भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू मांग और सेवाओं की ताकत पर आधारित है, जिससे वह वैश्विक संकट के बावजूद अपेक्षाकृत तेज गति से बढ़ सकती है। हालांकि ऊर्जा कीमतें, युद्ध और व्यापार अस्थिरता जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं, इसलिए आने वाले वर्षों में आर्थिक प्रदर्शन काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *