नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच पर एक ऐसा पल देखने को मिला, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कार्यक्रम में जब भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी में वैश्विक तकनीकी नेताओं से एकता का संदेश देने के लिए हाथ मिलाने को कहा गया, तब एक असहज स्थिति बन गई।
मंच पर मौजूद Sam Altman (OpenAI) और Dario Amodei (Anthropic) ने हाथ पकड़ने से परहेज किया और उसकी जगह मुट्ठियां हवा में लहराईं। यह दृश्य न सिर्फ चौंकाने वाला था, बल्कि AI इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और टकराव का प्रतीक भी बन गया।
पुरानी है दोनों के बीच तनातनी
ऑल्टमैन और अमोदेई के बीच यह खटास नई नहीं है। दरअसल, OpenAI और Anthropic के बीच प्रतिस्पर्धा की शुरुआत तब हुई, जब डारियो अमोदेई और उनकी बहन डेनिएला अमोदेई ने OpenAI छोड़ दिया था।
दोनों का मानना था कि कंपनी में सुरक्षा से ज्यादा व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी मतभेद के बाद उन्होंने Anthropic की स्थापना की, जिसका फोकस “AI सेफ्टी” को प्राथमिकता देना था।
तब से दोनों कंपनियां एक-दूसरे की सीधी प्रतिद्वंद्वी बन गईं और यह प्रतिस्पर्धा समय के साथ और तीखी होती चली गई।
विज्ञापन और सोशल मीडिया पर टकराव
हाल के महीनों में यह टकराव और खुलकर सामने आया है। फरवरी की शुरुआत में Anthropic ने एक विज्ञापन जारी किया, जिसमें ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन लाने के विचार पर तंज कसा गया इस पर सैम ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि Anthropic के प्रोडक्ट केवल अमीर यूजर्स के लिए हैं। उनका तर्क था कि AI को हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन-आधारित मॉडल जरूरी है, ताकि वे लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकें जो सब्सक्रिप्शन फीस नहीं दे सकते।
टेक्नोलॉजी में वर्चस्व की होड़
AI की दुनिया में यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रोडक्ट लॉन्च की रफ्तार में भी दिखाई देती है।
उदाहरण के तौर पर, जब Anthropic ने अपना Claude Opus 4.6 मॉडल लॉन्च किया, तो कुछ ही समय बाद OpenAI ने GPT-5.3 Codex पेश कर दिया। यह दिखाता है कि दोनों कंपनियां एक-दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए लगातार नई तकनीकों पर काम कर रही हैं।
ऑल्टमैन ने अपने कोडिंग टूल को इतना सक्षम बताया है कि वह इंसानों की तरह जटिल काम कर सकता है। वहीं, Anthropic का जोर सुरक्षित और नियंत्रित AI सिस्टम विकसित करने पर है।
मंच का पल बना बड़ा संकेत
भारत मंडपम के मंच पर हुआ यह छोटा सा इशारा—हाथ न मिलाना—दरअसल एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। यह दिखाता है कि AI इंडस्ट्री अब दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंटती नजर आ रही है।
एक तरफ वे कंपनियां हैं जो AI को तेजी से आम लोगों तक पहुंचाना चाहती हैं, जबकि दूसरी ओर वे संस्थाएं हैं जो सुरक्षा और नियंत्रण को प्राथमिकता देती हैं।
इस घटना ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में AI की दुनिया सिर्फ तकनीकी विकास की कहानी नहीं होगी, बल्कि यह प्रतिस्पर्धा, विचारधारा और वर्चस्व की लड़ाई का भी केंद्र बनने वाली है।