अहमदाबाद को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी दिलाने की दिशा में निर्णायक मोड़ों से गुजरते हुए भारत अब औपचारिक मंजूरी की राह पर है। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स फेडरेशन (cgf) की कार्यकारी समिति ने अहमदाबाद के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है और 26 नवंबर 2025 को होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग में मेजबानी का औपचारिक अप्रूवल बताया जा रहा है। यदि यह मंजूर हो जाता है तो यह आयोजन कॉमनवेल्थ गेम्स के शताब्दी समारोह के रूप में भी महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि पहला आयोजन 1930 में हैमिल्टन (कनाडा) में हुआ था।
भारतीय बोली प्रक्रिया जनवरी 2025 में सक्रिय हुई थी जब गुजरात सरकार और भारतीय खेल प्रतिनिधिमंडल ने cgf के वरिष्ठ कार्यालयों के साथ प्रारंभिक बातचीत की। इसके बाद मार्च से अगस्त 2025 के बीच बिड फाइलिंग और विस्तृत बिड डोजियर जमा करने की समयसीमा के तहत अहमदाबाद और अबुजा (नाइजीरिया) ही आधिकारिक रूप से आगे आए। अहमदाबाद ने खेल सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, खिलाड़ी गांव और खेलों के बाद विरासत योजना का विस्तृत नक्शा प्रस्तुत किया और यह है यही वजह थी कि अंतिम फैसले तक उसकी चाल तेज रही।
21 मार्च 2025 को भारत ने औपचारिक रूप से ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ पेश किया और जून में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल लंदन में cgf मुख्यालय गया। वहां आर्थिक मॉडल, आयोजन संरचना और दीर्घकालिक प्रभाव पर गहन चर्चा हुई। अनेक मीटिंगों और प्रस्तुति के बाद 13 अगस्त 2025 को भारतीय ओलंपिक संघ (ioa) की विशेष बैठक में अहमदाबाद की बोली को समर्थन मिला, और उसके बाद केन्द्र सरकार ने भी आधिकारिक रूप से इसे आगे बढ़ाया।
सितंबर 2025 में हुए अंतिम प्रेजेंटेशन में अहमदाबाद ने अपने स्टेडियम नेटवर्क, इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं और आयोजन के सामाजिक-आर्थिक लाभों का ठोस खाका पेश किया। इस प्रस्तुति में ioa अध्यक्ष, राज्य खेल मंत्रि और शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे और उनके समेकित प्रयासों ने cgf के सामने भारत की संभावनाओं को मजबूती से उभारा। परिणामतः कार्यकारी समिति ने प्रस्ताव को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया।
अब अगले निर्णायक चरण के रूप में 26 नवंबर 2025 की जनरल बॉडी मीटिंग शेष है जहां आधिकारिक रूप से मेजबानी अधिकार प्रदान किए जाएंगे। उसके बाद असली चुनौती शुरू होगी 2030 गेम्स को आयोजित करने के लिये तैयारी, वित्तपोषण, टाइमलाइन और लॉजिस्टिक्स को समय पर अमल में लाना। यह भारत के लिये केवल एक स्पोर्ट्स इवेंट नहीं होगा, बल्कि अन्तरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर उसकी स्थिति सुदृढ़ करने का एक बड़ा अवसर होगा।
लंबी अवधि के नजरिये से यह कदम 2036 ओलंपिक की मेजबानी के भारत के लक्ष्य को भी पूरक माना जा रहा है। अहमदाबाद की सफलता यदि 2030 में मजबूत और सुचारु साबित होती है, तो यह 2036 के लिये आवेदन की नींव को और मजबूत कर सकती है और भारत को वैश्विक खेल मंच पर नेतृत्व के आग्रह की दिशा में एक ठोस श्रेणी दे सकती है।