बिहार में चुनाव की तारीखें अभी जरूर दूर हैं लेकिन सियासी पारा चढ़ चुका है। सत्ता की चाबी किसके हाथ आएगी, ये तो समय बताएगा लेकिन दांव-पेंच शुरू है। सियासत तेज है। पक्ष हो या विपक्ष सभी खुद को मजबूत करने में जुटे हैं। लेकिन चुनाव से पहले ही विपक्ष को एक बड़ा झटका लग गया है। विपक्षी गठबंधन में दरार साफ दिखने लगी है। वजह है आम आदमी पार्टी। आम आदमी पार्टी ने बगावत कर दी है। पार्टी बिहार में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। खुद पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने इसका ऐलान किया है।
गठबंधन सिर्फ लोकसभा के लिए था: केजरीवाल
केजरीवाल ने दो टूक कहा कि इंडिया गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए था। विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। वे अकेले मैदान में उतरेंगे। केजरीवाल के इस फैसले से राहुल गांधी का वो सपना जरूर टूटकर बिखर जाएगा जिसमें उन्होंने दावा किया था कि हम सब मिलकर साथ लड़ेंगे और बीजेपी के विजय रथ को रोकेंगे।
NDA को मजबूत करने में जुटी है बीजेपी
एक तरफ जहां बीजेपी एनडीए को मजबूत करने के लिए अपने सहयोगी दलों के साथ लगातार सामंजस्य बैठाने की कोशिश में जुटी है। नीतीश कुमार से लेकर चिराग पासवान तक को साधने की कवायद की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष अभी अपनों से ही घिरा हुआ दिख रहा है। इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियां अपनों पर ही भरोसा नहीं जता पा रही हैं। इस खींचतान का नुकसान जहां गठबंधन को हो रहा है, वहीं बीजेपी को इससे मुस्कुराने का मौका मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर इंडिया गठबंधन में ऐसे ही फूट की स्थिति रही तो फिर नीतीश की अगुवाई में एनडीए एक बार फिर सत्ता पर काबिज हो जाएगी। चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि अगर जनता में एक बार यह मैसेज चला गया कि विपक्षी गठबंधन में शामिल पार्टियां आपस में ही तालमेल नहीं बैठा पा रही हैं तो फिर विपक्ष के लिए सत्ता को हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।
क्यों है ये केजरीवाल का मास्टर स्ट्रोक
उधर, केजरीवाल के इस कदम को कुछ राजनीतिक विश्लेषक मास्टर स्ट्रोक भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि दिल्ली हारने के बाद केजरीवाल के लिए अब खोने को ज्यादा कुछ नहीं बचा है। ऐसे में वे बिहार में अकेले एक प्रयोग करना चाहते हैं ताकि वे देख सकें कि जनता में उनकी पार्टी को लेकर विश्वसनीयता अभी भी बरकरार है या नहीं। अगर जनता उनकी पार्टी में विश्वास दिखाती है और पार्टी चुनाव में बेहतर कर जाती है तो फिर इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ेगा और आम आदमी पार्टी के दोबारा उठ खडा होने के लिए यह संजीवनी की तरह काम करेगा। फिलहाल यह तो आने वाला वक्त बताएगा कि ऊंट किस करवट बैठता है लेकिन इतना तो तय है कि केजरीवाल के इस ऐलान से जहां इंडिया गठबंधन की दरार दिखने लगी है, वहीं बीजेपी को मुस्कराने का एक और मौका मिल गया है। आपकी इस बारे में क्या राय है, कमेंट जरूर कीजिए।