पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक धार्मिक स्थल के पास हुए संदिग्ध आत्मघाती विस्फोट में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 160 से अधिक लोग घायल हो गए। यह धमाका शहजाद टाउन इलाके में स्थित तारलाई इमामबाड़ा, जो एक शिया मस्जिद है, के पास हुआ। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विस्फोट उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में लोग धार्मिक गतिविधियों के लिए इमामबाड़ा में मौजूद थे।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं।
राहत और बचाव कार्य शुरू
विस्फोट की सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल इलाज के लिए पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) और पॉलीक्लिनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए आपातकाल घोषित कर दिया है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
धमाके की प्रकृति पर जांच जारी
इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी पुलिस के प्रवक्ता तकी जवाद ने कहा कि फिलहाल धमाके की प्रकृति को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। उन्होंने बताया,
“यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि यह आत्मघाती हमला था या किसी अन्य तरीके से विस्फोट किया गया। फोरेंसिक टीम जांच के बाद ही इसकी पुष्टि कर सकेगी।”
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और घटनास्थल से सबूत जुटाने का काम जारी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें विस्फोट के बाद अफरा-तफरी का माहौल देखा जा सकता है। वीडियो में लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आ रहे हैं, जबकि सुरक्षाकर्मी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी घायलों की मदद करते दिखाई दे रहे हैं।
सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
वहीं, संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फ़ज़ल चौधरी ने भी इस घटना पर बयान जारी करते हुए कहा,
“इस तरह के आतंकी हमले देश के मनोबल को नहीं तोड़ सकते। इस समय ज़रूरत है कि हम शांति, सहिष्णुता और स्थिरता के लिए एकजुट हों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ एकजुटता दिखाएं।”
किसी संगठन ने नहीं ली जिम्मेदारी
फिलहाल इस विस्फोट की जिम्मेदारी किसी भी आतंकी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि, पाकिस्तान में शिया समुदाय को पहले भी निशाना बनाया जाता रहा है। इससे पहले हुए हमलों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे संगठनों पर आरोप लगते रहे हैं।
हालिया सुरक्षा हालात
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और बलूच अलगाववादी समूहों के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें करीब 216 आतंकवादी मारे जाने की जानकारी सामने आई थी।
इसके अलावा, यह घटना नवंबर 2025 में इस्लामाबाद के एक जिला एवं सत्र न्यायालय के बाहर हुए आत्मघाती हमले के लगभग तीन महीने बाद हुई है, जिसमें 12 लोगों की मौत और 30 लोग घायल हुए थे।
जांच जारी, सुरक्षा बढ़ाई गई
हमले के बाद इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। जांच एजेंसियां धमाके के पीछे की साजिश और जिम्मेदार तत्वों की पहचान में जुटी हुई हैं।