विन न्यूज़ नेटवर्क। भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अब एक नई रिपोर्ट ने इस खतरे की गंभीरता को और उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में SMS के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड के मामलों में 146 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यानी सिर्फ एक फर्जी मैसेज पर भरोसा करना आपके बैंक खाते को खाली कर सकता है।
साइबर सिक्योरिटी कंपनी BioCatch की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधी अब पहले से कहीं अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं। यही वजह है कि लोगों को ठगने के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं।
iPhone यूजर्स भी नहीं रहे सुरक्षित
अक्सर यह माना जाता है कि iPhone या iOS डिवाइस एंड्रॉयड की तुलना में अधिक सुरक्षित होते हैं, लेकिन ताजा रिपोर्ट इस धारणा को भी चुनौती देती है।
रिपोर्ट के अनुसार, iOS प्लेटफॉर्म पर साइबर फ्रॉड के मामलों में 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं Android डिवाइस पर यह वृद्धि 35 प्रतिशत रही।
इसका मतलब साफ है कि अब केवल महंगा स्मार्टफोन इस्तेमाल करना साइबर अपराध से सुरक्षा की गारंटी नहीं है। यदि यूजर सतर्क नहीं है तो किसी भी प्लेटफॉर्म पर धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है।
SMS स्कैम आखिर इतने प्रभावी क्यों हैं?
रिपोर्ट में बताया गया है कि SMS आज भी लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद संचार माध्यमों में से एक माना जाता है। यही भरोसा साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।
BioCatch के डायरेक्टर ऑफ ग्लोबल फ्रॉड इंटेलिजेंस टॉम पीकॉक के अनुसार, ठग ऐसे मैसेज भेजते हैं जो बैंक, सरकारी एजेंसी, डिलीवरी कंपनी या किसी लोकप्रिय डिजिटल सेवा की तरह दिखाई देते हैं। इन्हें देखकर लोग बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए लिंक पर क्लिक कर देते हैं या मांगी गई जानकारी साझा कर देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली भी अब साइबर अपराधियों के प्रमुख निशाने पर है।
कम समय में ज्यादा पैसा उड़ा रहे हैं साइबर अपराधी
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है। साइबर अपराधी अब पहले की तुलना में बहुत कम समय में बड़ा वित्तीय नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अध्ययन के मुताबिक, मोबाइल फ्रॉड सेशन की औसत अवधि 32 प्रतिशत कम हो गई है, लेकिन इस दौरान चोरी होने वाली रकम 1.7 गुना बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ठग अब सोशल इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन और एडवांस तकनीकों का इस्तेमाल कर कुछ ही मिनटों में लोगों के बैंक खातों से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता भी नहीं चलता, जब तक पूरा पैसा निकल नहीं जाता।
2025 में ₹22,496 करोड़ की साइबर ठगी
भारत में साइबर अपराध का आर्थिक असर भी लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के दौरान साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों में कुल ₹22,496 करोड़ की ठगी दर्ज की गई।
हालांकि, राहत की बात यह रही कि सुरक्षा एजेंसियों और बैंकिंग सिस्टम की सक्रियता के कारण करीब ₹9,000 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजैक्शन समय रहते रोक दिए गए, जिससे बड़ी राशि बचाई जा सकी।
इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि साइबर अपराध का वास्तविक नुकसान इससे भी अधिक हो सकता है, क्योंकि कई मामले अब भी रिपोर्ट नहीं किए जाते।
8.5 लाख संदिग्ध बैंक खाते आए जांच के दायरे में
रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों ने पिछले एक वर्ष में 700 बैंकों की लगभग 700 शाखाओं से जुड़े 8.5 लाख से अधिक संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है।
इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग स्थानों पर भेजने और छिपाने के लिए किया जा रहा था। जांच एजेंसियां अब ऐसे नेटवर्क को तोड़ने और दोषियों तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
कैसे बचें SMS फ्रॉड से?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी आपको लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।
इन बातों का हमेशा ध्यान रखें:
- किसी भी अनजान SMS में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें।
- बैंक, UPI PIN, OTP या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- संदिग्ध कॉल या मैसेज आने पर सीधे बैंक या संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।
- मोबाइल और बैंकिंग ऐप्स को हमेशा अपडेट रखें।
- किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल सतर्कता भी जरूरी
ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके अपना रहे हैं।
ऐसे में केवल बैंक और सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर डिजिटल यूजर की सतर्कता भी साइबर ठगी रोकने की सबसे मजबूत ढाल बन सकती है।