मुंबई में आगामी नगर निगम चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से अलगाव में रहने वाले ठाकरे परिवार के चचेरे भाई, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, एक बार फिर एक मंच पर आए हैं और आने वाले चुनावों में गठबंधन करने की घोषणा की है। बुधवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने जनता के सामने यह ऐलान किया कि शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अब “स्थायी रूप से एक साथ” रहेंगे।
इस ऐतिहासिक ऐलान से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। राज ठाकरे ने मराठी में कहा, “महाराष्ट्र लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहा था। मैं आज घोषणा करता हूं कि शिवसेना और MNS अब एक हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की भलाई और मराठी जनता के हित उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। राज ने यह भी वादा किया कि मुंबई के महापौर मराठी व्यक्ति होंगे और वह या उद्धव ठाकरे की पार्टी से होंगे। इसके जवाब में उद्धव ठाकरे ने कहा, “मराठी लोग आम तौर पर किसी को परेशान नहीं करते, लेकिन अगर कोई उनकी राह में बाधा डालता है, तो उसे बख्शा नहीं जाता।”
हालांकि गठबंधन की घोषणा हो गई है, लेकिन महाराष्ट्र की 29 नगरपालिकाओं में सीटों के बंटवारे को लेकर अभी भी कुछ अनसुलझा रहस्य बना हुआ है। खासकर मुंबई की दादर, माहिम, बोरिवली, विक्रोली, भांडुप और सिवरी क्षेत्रों में सीट आवंटन को लेकर दोनों पार्टियों के बीच पहले भी मतभेद की खबरें आई थीं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि MNS के साथ गठबंधन के अलावा, एनसीपी (SP) के साथ भी बातचीत जारी है।
मुंबई के अलावा ठाकरे गठबंधन का ध्यान ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और नासिक पर भी रहेगा। यह गठबंधन केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि राज और उद्धव ठाकरे के राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण का परिणाम भी माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने अपनी राजनीतिक यात्रा में मराठी गौरव और “हिंदी थोपाव” के खिलाफ एकजुट होने की बात कही है।
उद्धव और राज ठाकरे का यह मिलन इस साल जुलाई में वर्ली, मुंबई में आयोजित एक रैली के बाद हुआ था, जिसमें दोनों भाइयों ने दो दशकों से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को समाप्त किया। उस समय रैली का उद्देश्य महाराष्ट्र सरकार के स्कूलों में कक्षा 1 से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने के निर्णय को रद्द करने के फैसले का जश्न मनाना था। दोनों नेताओं ने मिलकर कहा था कि मराठी गौरव और भाषा पर किसी भी तरह के दबाव को वे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
राज ठाकरे ने जनवरी 2006 में शिवसेना छोड़कर MNS की स्थापना की थी। इसके बाद दोनों परिवार के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता शुरू हो गई थी। राज, शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के भतीजे हैं और उद्धव ठाकरे उनके पुत्र हैं। उस समय से दोनों पार्टियों में मतभेद और चुनावी टकराव देखा गया। लेकिन अब दोनों ने पुरानी राजनीतिक दुश्मनी को भुलाकर मराठी गौरव और महाराष्ट्र के हितों के लिए एक साथ आने का संदेश दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गठबंधन आगामी 15 जनवरी के मुंबई नगर निगम चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। शिवसेना और MNS का एकजुट होकर चुनाव में उतरना, राज्य की राजनीति में नई दिशा दे सकता है। साथ ही यह गठबंधन मुंबई और आसपास के प्रमुख क्षेत्रों में मराठी मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करेगा।
राज और उद्धव ठाकरे के एक साथ आने की यह पहल केवल राजनीतिक गठबंधन नहीं, बल्कि मराठी पहचान और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और भाषाई अस्मिता को बचाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी चुनावों में यह गठबंधन अन्य पार्टियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है और महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति में संतुलन बदल सकता है।
ठाकरे परिवार के चचेरे भाइयों का यह मिलन न केवल भावी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाएगा, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी गौरव और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर एक नई लहर भी पैदा करेगा। 29 नगरपालिकाओं में सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीतियों को लेकर अभी कई राजनीतिक मोड़ आने की संभावना है, लेकिन उद्धव और राज ठाकरे के एकजुट होने का संदेश पहले ही जनता और राजनीतिक दलों के बीच स्पष्ट हो चुका है।