आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासेमा जिले के इरसुमंडा गांव, मलिकिपुरम मंडल में ONGC की एक ड्रिलिंग साइट पर गंभीर गैस लीक की घटना हुई। घटना के समय साइट पर भारी धुआँ और आग की लपटें उठती देखी गईं, जिससे आसपास के इलाके में भय और हड़कंप फैल गया। स्थानीय लोग और साइट पर मौजूद कर्मचारी काफी चिंतित हो गए और तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। यह लीक लगभग दो घंटे तक लगातार जारी रहा, जिससे अधिकारियों के लिए स्थिति नियंत्रण में लाना चुनौतीपूर्ण हो गया।
मौके पर तत्काल तहसीलदार श्रीनिवास राव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने और धैर्य रखने की अपील की। अधिकारियों ने बताया कि वरिष्ठ ONGC अधिकारियों को तुरंत घटना की जानकारी दे दी गई है और तकनीकी विशेषज्ञों को साइट पर भेजा जा रहा है ताकि गैस लीक को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जा सके।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में अब तक किसी के घायल होने या मृत्यु की कोई रिपोर्ट नहीं है। हालांकि, घटना के दौरान साइट पर मौजूद कर्मचारी और आसपास के निवासी काफी तनाव और भय के माहौल में रहे। स्थानीय प्रशासन ने घबराए हुए लोगों को शांत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के गैस लीक हादसे कभी-कभी तकनीकी खराबियों, ड्रिलिंग उपकरणों की खराब स्थिति या गैस दबाव की अनियंत्रित वृद्धि के कारण हो सकते हैं। ONGC की टीम ने कहा है कि वह सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए तुरंत लीक को नियंत्रित करने के लिए काम कर रही है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तेल और गैस क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजाम कितने महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन और कंपनी के तकनीकी अधिकारी दोनों मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आसपास के लोग और कर्मचारी सुरक्षित रहें। साथ ही, प्रभावित इलाके में किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए राहत और बचाव के उपाय शुरू कर दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों ने भी अधिकारियों के जल्दी पहुंचने और स्थिति पर नियंत्रण पाने के प्रयासों की सराहना की। हालांकि यह घटना भयावह प्रतीत हुई, लेकिन किसी के घायल न होने की खबर से कुछ राहत मिली है। अधिकारी अब यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों और सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाए।
आंध्र प्रदेश के कोनासेमा जिले की यह घटना यह याद दिलाती है कि गैस और ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वालों के लिए सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए और त्वरित प्रतिक्रिया ही बड़ी आपदा को टाल सकती है।