H1B वीजा खत्म करने का प्रस्ताव अमेरिकी संसद में पेश, EXILE एक्ट पर क्या है पूरा मामला और भारतीयों पर संभावित असर

Priyanshu Kumari
Priyanshu Kumari
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रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने H1B वीजा प्रोग्राम समाप्त करने के लिए EXILE एक्ट पेश किया।

अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने H1B वीजा प्रोग्राम को समाप्त करने के उद्देश्य से एक विधेयक पेश किया है। ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटिव इंपोर्टेड लेबर एग्जंप्शन (EXILE) एक्ट’ नामक यह प्रस्ताव फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में पेश किया गया है।

क्या है EXILE एक्ट?
ग्रेग स्ट्यूबी ने सोमवार, 9 फरवरी 2026 को यह विधेयक पेश किया। प्रस्तावित कानून में इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के सेक्शन 214(g)(1)(A) में संशोधन का सुझाव दिया गया है।

प्रेस रिलीज के अनुसार, इस संशोधन के तहत वित्तीय वर्ष 2027 से प्रत्येक वर्ष जारी किए जाने वाले H1B वीजा की संख्या शून्य करने का प्रावधान किया गया है। यानी यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो H1B वीजा प्रोग्राम प्रभावी रूप से समाप्त हो सकता है।

सांसद ग्रेग स्ट्यूबी का क्या कहना है?
ग्रेग स्ट्यूबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज मैं H1B वीजा प्रोग्राम खत्म करने के लिए विधेयक पेश कर रहा हूं। लंबे समय से इस H1B वीजा प्रोग्राम के चलते अमेरिकी कामगारों को नुकसान हुआ है। कंपनियां सस्ते विदेशी कामगारों को बुलाकर अपने मुनाफे के लिए सिस्टम का दुरुपयोग करती रही हैं, जिसकी वजह से वेतन में कमी आई है और अमेरिकी अच्छी सैलरी वाली नौकरियों से वंचित रह गए।”

उनके कार्यालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि EXILE एक्ट का उद्देश्य उन चिंताओं को दूर करना है जिनके अनुसार विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देने से अमेरिकी नागरिकों की भलाई और राष्ट्रीय हित प्रभावित होते हैं। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिकी कर्मचारियों और युवाओं को H1B प्रोग्राम के कारण विस्थापन का सामना करना पड़ा है।

प्रेस रिलीज में किए गए दावे
प्रेस रिलीज में कुछ उदाहरणों का उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया कि H1B वीजा प्रोग्राम के तहत 5,000 विदेशी डॉक्टरों को बुलाया गया, जिससे 10,000 से अधिक अमेरिकी फिजिशियन रेजीडेंसी प्रोग्राम में प्रवेश से वंचित रह गए।

इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि पिछले वर्ष 16,000 से अधिक अमेरिकी कर्मचारियों को माइक्रोसॉफ्ट में विस्थापित होना पड़ा, जबकि 9,000 विदेशी कामगारों को नौकरियां दी गईं। साथ ही, 2015 में डिज्नी द्वारा 250 अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर विदेशी कामगारों को नियुक्त करने का भी उल्लेख किया गया है।

इन दावों का उल्लेख प्रेस रिलीज में किया गया है। फिलहाल इन दावों पर स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

भारतीयों पर संभावित असर
H1B वीजा अमेरिका का एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। यह वीजा मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, मेडिकल, वित्त और अन्य पेशेवर क्षेत्रों के लिए उपयोग किया जाता है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, H1B वीजा धारकों में बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की होती है। रिपोर्टों के मुताबिक, H1B वीजा प्राप्त करने वालों में लगभग 70 प्रतिशत भारतीय होते हैं। ऐसे में यदि यह विधेयक पारित होता है, तो भारतीय पेशेवरों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

अभी क्या है विधायी स्थिति?
यह विधेयक फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश किया गया है। अभी इस पर न तो औपचारिक बहस हुई है और न ही मतदान।

आगामी प्रक्रिया के तहत इस विधेयक को संबंधित हाउस कमेटी को भेजा जाएगा, जहां इस पर विचार किया जाएगा। यदि कमेटी इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है और प्रतिनिधि सभा में यह पारित हो जाता है, तो इसके बाद इसे अमेरिकी कांग्रेस के उच्च सदन सीनेट में भेजा जाएगा।

सीनेट से मंजूरी मिलने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह विधेयक कानून का रूप ले सकेगा।

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