India-US Trade Deal पर कांग्रेस का हमला: ‘नमस्ते ट्रंप’ पड़ा भारी? जयराम रमेश के गंभीर आरोप

Priyanshu Kumari
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा।

भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस डील पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि इस समझौते के कई पहलू भारत के हितों के खिलाफ हो सकते हैं।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में कहा कि भारत-अमेरिका संयुक्त घोषणा में कई अहम बिंदु अस्पष्ट हैं। उनके अनुसार, उपलब्ध जानकारियां यह संकेत देती हैं कि इस समझौते का बोझ अंततः भारत को उठाना पड़ सकता है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस डील के बाद भारत को रूस से तेल आयात पर दबाव झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि यदि भारत रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल खरीदता है, तो उस पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगाया जा सकता है। जयराम रमेश के अनुसार, यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वतंत्र विदेश नीति के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने किसानों के हितों को लेकर भी सवाल उठाए। जयराम रमेश का कहना है कि इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है। उनका आरोप है कि सरकार ने किसानों की सुरक्षा को लेकर ठोस गारंटी नहीं दी है।

व्यापार संतुलन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस डील के बाद अमेरिका से भारत का आयात तीन गुना तक बढ़ सकता है। इससे भारत का व्यापारिक सरप्लस खत्म हो सकता है, जो लंबे समय से देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत रहा है।

आईटी और सेवा क्षेत्र को लेकर भी जयराम रमेश ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस समझौते में भारतीय आईटी कंपनियों और सेवा निर्यात को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया है। इससे भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है।

जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि भारतीय वस्तु निर्यात को अब अमेरिका में पहले से ज्यादा शुल्कों का सामना करना पड़ेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता घट सकती है।

अपने बयान के अंत में उन्होंने राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि इतनी मुलाकातों, तस्वीरों और कार्यक्रमों के बावजूद भारत को ठोस लाभ नहीं मिला। उन्होंने टिप्पणी की कि “दोस्त-दोस्त न रहा” और “नमस्ते ट्रंप” सरकार की नीति पर भारी पड़ गया।

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