बजट 2026 से पहले जीवन बीमा उद्योग की मांगें: टैक्स समानता और किफायती उपायों से रिटायरमेंट कवरेज बढ़ाने पर जोर

Vin News Network
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केंद्रीय बजट 2026 से पहले जीवन बीमा क्षेत्र ने टैक्स और रिटायरमेंट सुधारों पर जोर दिया

केंद्रीय बजट 2026 से पहले जीवन बीमा उद्योग ने सरकार के सामने कुछ अहम नीतिगत सुझाव रखे हैं। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी बजट जीवन बीमा को दीर्घकालिक बचत और रिटायरमेंट प्लानिंग के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। टैक्स में समानता, नीतिगत निरंतरता और किफायती उपायों के जरिए बीमा कवरेज को खासतौर पर रिटायरमेंट और ग्रामीण आबादी तक विस्तारित किया जा सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026, रविवार को केंद्रीय बजट पेश करेंगी।

हालिया नीतिगत कदमों पर आगे बढ़ने की जरूरत
हाल के वर्षों में सरकार द्वारा लिए गए कुछ फैसलों ने बीमा क्षेत्र को समर्थन दिया है। विशेष रूप से बीमा प्रीमियम को वस्तु एवं सेवा कर (GST) से मुक्त किए जाने को उद्योग के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। जीवन बीमा कंपनियों का कहना है कि अब जरूरत इस आधार को और मजबूत करने की है, ताकि विभिन्न आय वर्गों में बीमा को अपनाने की प्रक्रिया तेज हो सके।

बजाज लाइफ इंश्योरेंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तरुण चुघ ने कहा, “हालिया नीतिगत उपायों ने इस सेक्टर के विकास के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। बजट 2026 के जरिए जीवन बीमा को दीर्घकालिक बचत और रिटायरमेंट समाधान के रूप में और अधिक मजबूती दी जा सकती है।”

रिटायरमेंट कवरेज में मौजूद अंतर
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, भारत में बीमा क्षेत्र ने प्रगति की है, लेकिन रिटायरमेंट प्लानिंग के लिहाज से बीमा की पहुंच अब भी सीमित है। तरुण चुघ का कहना है कि बीमा एन्युटी (Annuity) के टैक्स ट्रीटमेंट को अन्य पेंशन साधनों के समान लाना एक अहम सुधार हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि एन्युटी भुगतान पर केवल रिटर्न वाले हिस्से पर टैक्स लगाया जाए, जैसा कि अन्य पेंशन उत्पादों में होता है, और समान कर छूट दी जाए, तो उपभोक्ता टैक्स लाभ की बजाय अपनी जरूरतों के आधार पर रिटायरमेंट उत्पादों का चयन कर सकेंगे।

बीमा उत्पादों में टैक्स समानता की मांग
जीवन बीमा उद्योग एक सरल और समान कर ढांचे की भी मांग कर रहा है। तरुण चुघ के अनुसार, पारंपरिक जीवन बीमा पॉलिसियों और यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) के बीच टैक्सेशन में समानता लाने से दीर्घकालिक निवेश और सुरक्षा दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि टैक्स नियमों में एकरूपता से पॉलिसीधारकों के लिए समझ आसान होगी और बीमा को एक प्रभावी वित्तीय योजना उपकरण के रूप में अपनाया जा सकेगा।

ग्रामीण और सामाजिक बीमा पर फोकस
ग्रामीण और सामाजिक बीमा सेगमेंट में किफायत अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उद्योग का मानना है कि लेनदेन लागत को कम किए बिना इन क्षेत्रों में बीमा की पहुंच बढ़ाना मुश्किल है।

तरुण चुघ ने सुझाव दिया कि कम प्रीमियम वाली बीमा पॉलिसियों पर स्टांप ड्यूटी से छूट दी जानी चाहिए। इससे बीमा की लागत घटेगी और ग्रामीण तथा वंचित क्षेत्रों में बीमा कवरेज का विस्तार संभव हो सकेगा।

घरेलू वित्तीय मजबूती की दिशा में कदम
बीमा उद्योग का कहना है कि यदि बजट 2026 में टैक्स सुधार, किफायती उपाय और रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़े ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो जीवन बीमा भारतीय परिवारों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है।

तरुण चुघ के अनुसार, सही नीतिगत समर्थन से जीवन बीमा न केवल रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि वित्तीय समावेशन और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता में भी योगदान देगा।

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