उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद के बीच अयोध्या के वस्तु एवं सेवा कर (GST) आयुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से वह “गहराई से आहत और पीड़ित” महसूस कर रहे थे। सिंह ने दावा किया कि उन्होंने यह निर्णय सरकार के पक्ष में और शंकराचार्य के आरोपों के विरोध में लिया है।
इस्तीफे का कारण बताया नैतिक जिम्मेदारी
प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि सरकार, जो उनका वेतन देती है, उसके प्रति उनकी कुछ नैतिक जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कहा,
“पिछले दो दिनों से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ लगाए गए निराधार आरोपों से मैं बहुत आहत था। सरकार के पक्ष में और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है।”
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयान सुने तो उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया।
सोशल मीडिया पर सामने आया वीडियो
इस घटनाक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें प्रशांत कुमार सिंह फोन पर अपनी पत्नी से बात करते हुए रोते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वह कहते सुने जा सकते हैं कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और वह उन लोगों के अपमान को सहन नहीं कर सके, जिनके कारण उनका जीवनयापन संभव है।
वीडियो में सिंह यह भी कहते हैं कि उनके दो बच्चे हैं और बीते दो दिनों से वह ठीक से सो नहीं पाए थे। उन्होंने कैमरे की ओर देखते हुए कहा कि वह अपनी पत्नी से बात कर रहे थे और अंदर से बहुत आहत महसूस कर रहे हैं।
माघ मेला विवाद से जुड़ा मामला
प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे की पृष्ठभूमि प्रयागराज में चल रहे माघ मेला विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। यह विवाद ‘मौनी अमावस्या’ के दिन उस समय शुरू हुआ, जब पुलिस ने कथित तौर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम में स्नान करने से रोका।
शंकराचार्य के शिविर की ओर से दावा किया गया कि वह पालकी में सवार होकर संगम की ओर जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें उतरकर पैदल चलने को कहा। आरोप है कि मना करने पर उनके समर्थकों के साथ मारपीट की गई। इसके बाद शंकराचार्य ने कथित तौर पर भोजन और जल त्याग कर विरोध शुरू कर दिया और प्रशासन से माफी की मांग की।
प्रशासन की ओर से जारी नोटिस
इस विवाद के बीच मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को एक नोटिस जारी किया। नोटिस में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया कि वह “ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य” की उपाधि का उपयोग किस आधार पर कर रहे हैं।
प्रशासन ने यह भी कहा कि इस पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है और शीर्ष अदालत ने निर्णय आने तक किसी को भी इस पद पर अभिषेक न करने का आदेश दिया है। प्रशासन का कहना है कि शिविर में लगाए गए बोर्ड पर इस उपाधि का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर शंकराचार्यों का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं को ठेस पहुंचाई जा रही है और साधु-संतों से पहचान पत्र मांगना अनुचित है।
हिंदू महासभा ने भी इस मुद्दे पर बैठक कर कथित दुर्व्यवहार की निंदा की और सार्वजनिक माफी की मांग की। हालांकि, संगठन ने यह भी कहा कि यह पूरी घटना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश हो सकती है।
पूर्व मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री और भाजपा नेता उमा भारती ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी, लेकिन स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का अर्थ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोध का समर्थन करना नहीं है।
अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे को लेकर राज्य सरकार या जीएसटी विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले पर प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।