सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीर
सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई, जिसमें वे हाथ में पोस्टर लिए खड़े नजर आए। पोस्टर पर लिखा था, “#UGC Roll Back… काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”
इस तस्वीर के सामने आने के बाद उनके इस्तीफे की खबर ने तेजी से सोशल मीडिया पर प्रसार लिया।
27 मई 2025 को संभाला था कार्यभार
कानपुर नगर के मूल निवासी अलंकार अग्निहोत्री का जन्म 19 मई 1982 को हुआ था। उनका चयन वर्ष 2019 में डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ था। इसके बाद उन्होंने उन्नाव, बलरामपुर, एटा और लखनऊ में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवाएं दीं।
अलंकार अग्निहोत्री ने 27 मई 2025 को बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यभार ग्रहण किया था। कार्यभार संभालने के कुछ ही समय बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
‘पुनरुत्थान बरेली परिवार’ नाम से बनाया था ग्रुप
बरेली में तैनाती के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पर ‘पुनरुत्थान बरेली परिवार’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में फिलहाल 529 सदस्य जुड़े हुए हैं।
सोमवार को उनके इस्तीफे से जुड़ी जानकारी सबसे पहले इसी ग्रुप में साझा की गई। ग्रुप में जुड़े सदस्यों ने इस्तीफा न देने की अपील भी की, जबकि कुछ लोगों ने इसे वैचारिक निर्णय बताते हुए समर्थन जताया। वहीं, कुछ सदस्यों ने संवैधानिक पद पर बने रहना आवश्यक बताया।
यूजीसी के नए कानून पर जताया विरोध
अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए कानून पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि नए नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है।
उनके अनुसार, यह कानून छात्रों के करियर और व्यक्तिगत जीवन के लिए जोखिम पैदा कर सकता है और इससे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों का शोषण होगा। उन्होंने कहा कि यह नियम सामाजिक विषमता को बढ़ावा देगा।
उन्होंने ब्राह्मण समाज से जुड़े सांसदों और विधायकों पर भी सवाल उठाए और कहा कि वे इस मुद्दे पर विरोध दर्ज नहीं कर रहे हैं।
इस्तीफे में प्रयागराज की घटना का उल्लेख
अपने इस्तीफे पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने लिखा है कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के समय ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा मारपीट की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर शिखा पकड़कर घसीटा गया और उसकी धार्मिक मर्यादा का हनन किया गया। उन्होंने लिखा कि चोटी या शिखा ब्राह्मणों, साधु-संतों का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है।
ब्राह्मण विरोधी सोच का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने पत्र में कहा कि प्रयागराज की घटना से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मण समाज का अपमान किया गया है। उन्होंने इस घटना को गंभीर और चिंताजनक बताया।
उन्होंने यह भी लिखा कि इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि स्थानीय प्रशासन और वर्तमान राज्य सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है और साधु-संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
सिटी मजिस्ट्रेट जैसे संवैधानिक पद पर तैनात अधिकारी के इस्तीफे के बाद बरेली समेत पूरे प्रदेश में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।