कर्नाटक में लोकसभा चुनाव 2024 के बाद कराई गई एक विस्तृत, चुनाव आयोग समर्थित अध्ययन रिपोर्ट ने मतदान प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर जनता के भरोसे को लेकर अहम तथ्य सामने रखे हैं। यह रिपोर्ट कांग्रेस नेता राहुल गांधी के “वोट चोरी” के दावों के बीच आई है और राज्य में उच्च मतदान प्रतिशत तथा ईवीएम पर मजबूत विश्वास को रेखांकित करती है।
मतदाता जागरूकता अभियानों की प्रभावशीलता को परखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी (KMEA) को SVEEP कार्यक्रम का मूल्यांकन सौंपा था। इस अध्ययन का शीर्षक था— ‘लोकसभा चुनाव 2024: नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार (KAP) का एंडलाइन सर्वे’। इसे कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार के निर्देश पर कराया गया।
यह सर्वे राज्य के चार प्रमुख संभागों—बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूर—के 102 विधानसभा क्षेत्रों में 5,100 उत्तरदाताओं के बीच किया गया। यह राज्य में चुनाव के बाद किए गए सबसे व्यापक आकलनों में से एक माना जा रहा है।
उच्च मतदान और ईवीएम पर मजबूत भरोसा
रिपोर्ट के मुताबिक, 95.75 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्होंने मतदान किया। यह आंकड़ा न सिर्फ मजबूत नागरिक भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में विश्वास को भी उजागर करता है। सर्वे में शामिल 83.61 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें चुनावी व्यवस्था और ईवीएम दोनों पर भरोसा है।
मतदाता सूची को लेकर जागरूकता भी काफी ऊंची रही। 85.31 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे मतदाता सूची के बारे में जानते हैं। हालांकि, ऑनलाइन पंजीकरण, होम वोटिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं की जानकारी अपेक्षाकृत कम पाई गई।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि “सभी संभागों में बड़ी संख्या में उत्तरदाताओं का मानना है कि ईवीएम सटीक और भरोसेमंद परिणाम देती हैं।” खास बात यह रही कि ईवीएम पर सबसे अधिक भरोसा कलबुर्गी संभाग में दर्ज किया गया—वही इलाका जहां से “वोट चोरी” के आरोप पहली बार सामने आए थे।
SVEEP कार्यक्रम और बढ़ता मतदान प्रतिशत
SVEEP यानी Systematic Voters’ Education and Electoral Participation कार्यक्रम 2009 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाना और भागीदारी को मजबूत करना है। इसका फोकस पहली बार वोट देने वालों, महिलाओं, युवाओं, दिव्यांगों और हाशिए पर मौजूद समुदायों पर रहता है।
कर्नाटक में इस पहल का असर मतदान प्रतिशत में दिखा। 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां मतदान 68.81 प्रतिशत था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 71.98 प्रतिशत हो गया।
जागरूकता में प्रगति, लेकिन कुछ कमियां बरकरार
KAP सर्वे, गहन साक्षात्कार, फोकस ग्रुप चर्चाओं और बूथ स्तर के अध्ययन से यह सामने आया कि EPIC कार्ड का प्रसार लगभग सार्वभौमिक है—99.02 प्रतिशत उत्तरदाताओं के पास मतदाता पहचान पत्र था। इसके बावजूद कई सेवाओं को लेकर जानकारी सीमित रही। केवल 30.39 प्रतिशत लोग राष्ट्रीय मतदाता दिवस की सही तारीख बता सके।
मतदाताओं ने चुनाव में धन और बाहुबल के प्रभाव को लेकर चिंता जताई, खासकर कलबुर्गी के कुछ हिस्सों में। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं ने प्रक्रिया को अपेक्षाकृत निष्पक्ष माना और इसके लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की सक्रिय भूमिका को श्रेय दिया।
इसके उलट, शहरी युवाओं में उदासीनता और संदेह ज्यादा दिखा। कई युवाओं ने राजनीति में “एलीट वर्चस्व” और पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए असंतोष जताया।
BLO की भूमिका सबसे प्रभावी
SVEEP गतिविधियों में पोस्टर और होर्डिंग सबसे अधिक नजर आए, लेकिन मतदाता जुड़ाव के लिहाज से घर-घर जाकर संपर्क और BLO द्वारा किए गए अभियान सबसे असरदार साबित हुए। डिजिटल प्लेटफॉर्म और इलेक्टोरल लिटरेसी क्लबों की पहुंच सीमित रही, खासकर महिलाओं, एससी-एसटी और जनजातीय समुदायों के बीच।
सर्वे के दूसरे चरण में यह भी सामने आया कि केवल 18.37 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने चुनाव से जुड़ी वेबसाइटों या ऐप्स का इस्तेमाल किया। मतदाता पंजीकरण और जागरूकता के लिए 47.21 प्रतिशत लोगों ने BLO की मदद को सबसे अहम स्रोत बताया।
दिव्यांग मतदाताओं की चुनौतियां
दिव्यांग मतदाताओं में विशेष अभियानों और पोस्टल बैलेट की जानकारी अपेक्षाकृत बेहतर थी, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाओं की कमी बड़ी बाधा बनी रही। अलग कतारों का अभाव, सुलभ ढांचे की कमी और परिवहन समस्याएं आम शिकायतें रहीं। दिव्यांग महिलाओं को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट बताती है कि कर्नाटक में मतदाता जागरूकता और भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हालांकि, अंतिम छोर तक पहुंच, डिजिटल समावेशन और अधिकारों की समान जानकारी को लेकर अभी भी चुनौतियां मौजूद हैं। इसके बावजूद, उच्च मतदान और ईवीएम पर मजबूत भरोसा चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाले दावों के लिए एक ठोस प्रतिपक्ष प्रस्तुत करता है।