चांदी में उतार-चढ़ाव के बावजूद दीर्घकालिक तेजी बरकरार, कीमतों को सहारा दे रहे मजबूत बुनियादी कारक

Vin News Network
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तेज गिरावट के बाद चांदी की कीमतों में रिकवरी, लंबी अवधि का रुझान अब भी मजबूत

हाल के दिनों में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। एक ओर जहां एक ही दिन में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं अगले सत्र में कीमतों ने तेज रिकवरी दिखाई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद चांदी का लंबी अवधि का आउटलुक अब भी सकारात्मक बना हुआ है।

मंगलवार को भारतीय बाजार में चांदी की कीमतों में मजबूती लौटी। MCX पर चांदी 4 प्रतिशत से अधिक उछलकर लगभग 2.36 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। इससे पहले सोमवार को चांदी ने इतिहास रचते हुए 2.54 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया था। हालांकि मुनाफावसूली के चलते कीमतों में तेज गिरावट आई और भाव 2.25 लाख रुपये प्रति किलो तक लुढ़क गए।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर चांदी करीब 73 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर हुई, जबकि एक दिन पहले इसमें लगभग 9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। यह गिरावट पिछले पांच वर्षों में सबसे तेज मानी जा रही है।

सोने की कीमतों में भी हल्का दबाव देखने को मिला, हालांकि गिरावट चांदी के मुकाबले सीमित रही। विशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं में यह गिरावट तकनीकी कारणों से आई, क्योंकि कीमतें बहुत तेजी से ऊपर गई थीं। बाजार में कम लिक्विडिटी होने के कारण उतार-चढ़ाव और ज्यादा बढ़ गया।

सिंगापुर में स्पॉट मार्केट में चांदी करीब 73.06 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि इससे पहले यह 84 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी थी। सोने की कीमतें भी 4,343 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी रहीं।

2025 में चांदी ने निवेशकों को चौंकाने वाला रिटर्न दिया है। केंद्रीय बैंकों की खरीद, ETF में लगातार निवेश और अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती ने इसकी कीमतों को मजबूत समर्थन दिया है। यही वजह है कि चांदी इस साल वैश्विक कमोडिटी बाजारों की टॉप परफॉर्मर बनकर उभरी है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, चांदी की मौजूदा तेजी केवल सट्टेबाजी का परिणाम नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक बाजार में चांदी की वास्तविक कमी, सीमित आपूर्ति और नीति संबंधी प्रतिबंध कीमतों को ऊपर बनाए हुए हैं।

भारत में चांदी की कीमतें आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ चलती हैं। फिलहाल देश में एक किलो चांदी की कीमत करीब 2,33,480 रुपये है, जबकि 10 ग्राम चांदी 2,334.80 रुपये में मिल रही है।

शहरों के हिसाब से कीमतों में अंतर देखा जा रहा है। मुंबई में चांदी 233.76 रुपये प्रति ग्राम, दिल्ली में 223.21 रुपये, चेन्नई में 224.25 रुपये, हैदराबाद में 223.95 रुपये और अहमदाबाद में 223.89 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रही है। यह अंतर स्थानीय कर और परिवहन लागत की वजह से होता है।

MOSL का कहना है कि चांदी की मांग सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और अन्य आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में चांदी की खपत तेजी से बढ़ रही है, जिससे औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है।

ब्रोकरेज ने निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी की सलाह दी है। COMEX पर 75 डॉलर का स्तर पहले ही हासिल किया जा चुका है और अगला लक्ष्य 77 डॉलर रखा गया है। घरेलू बाजार में यह स्तर करीब 2.46 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास बैठता है। आने वाले समय में कीमतों की दिशा आपूर्ति, मांग और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी।

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