असम विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र मंगलवार से शुरू हो गया है। इस सत्र की सबसे बड़ी विशेषता 1983 के चर्चित नेल्ली हत्याकांड से जुड़ी तेवारी और मेहता आयोग की रिपोर्टों का सदन में प्रस्तुत किया जाना है। हालांकि, इन रिपोर्टों पर चर्चा नहीं की जाएगी। नेल्ली नरसंहार में 2,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और करीब तीन लाख लोग बेघर हो गए थे। लंबे समय से सार्वजनिक न होने वाली ये रिपोर्टें अब विधायकों और विधानसभा पुस्तकालय को उपलब्ध कराई जाएंगी।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सत्र की शुरुआत पर कहा कि “असम एक बड़े परिवर्तनकारी सत्र के लिए तैयार है—परिवारों की सुरक्षा से लेकर कानूनों के आधुनिकीकरण तक व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले भी रिपोर्टें सदन में पेश करने का वादा किया गया था, लेकिन मुद्रित प्रतियां कभी जारी नहीं हुईं।
18 महत्वपूर्ण बिल होंगे पेश
इस सत्र में सरकार 18 प्रमुख बिल लाने जा रही है, जिनमें एंटी-लव जिहाद, एंटी-पॉलीगैमी, भूमि-राजस्व संशोधन और पशु क्रूरता रोकथाम जैसे कानून शामिल हैं। सरकार के अनुसार ये प्रस्तावित कानून राज्य के सामाजिक ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव लाएंगे।
जुबीन गर्ग की मौत पर चर्चा को मिली मंजूरी
सत्र के पहले दिन ही सदन में गायक जुबीन गर्ग की मौत पर चर्चा के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। विपक्ष के नेता देबबरत सैकिया और विधायक अखिल गोगोई ने इस मुद्दे को उठाया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी इस मामले में सरकार की गंभीरता जताते हुए स्थगन प्रस्ताव को अनुमति देने का अनुरोध किया।
स्पीकर बिस्वजित दैमारी ने चर्चा की मंजूरी देते हुए कहा कि जांच को प्रभावित करने वाली किसी भी टिप्पणी से बचा जाए। चर्चा के बाद सरकार आवश्यक बिल और अतिरिक्त अनुदान भी सदन में पेश करेगी।