हर वर्ष दीपावली हमारे जीवन में रौशनी, सुख-समृद्धि और आशा की एक नई किरण लेकर आती है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की जीत और निराशा से आशा की ओर बढ़ने का प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर हम अपने घरों को दीयों से सजाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और अपने प्रियजनों के साथ त्योहार का आनंद लेते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आपके द्वारा जलाया गया एक छोटा-सा दीया किसी के जीवन में भी उजाला फैला सकता है इसी विचार को साकार रूप देने के लिए ‘मिशन उजाला हर घर रौशन’ की शुरुआत की गई है। यह एक जन-सहभागिता अभियान है जो आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करता है और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को जन-जन तक पहुँचाता है। इस दीपावली हम सभी से अनुरोध है कि बाज़ार में बिकने वाले प्लास्टिक और मशीन-निर्मित सजावटी सामान की बजाय स्थानीय कलाकारों, कुम्हारों, महिलाओं और विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित दीयों को अपनाएं।
मिशन शक्ति, मिशन ध्रुव और कुम्हार समुदाय का योगदान
इस अभियान में मिशन शक्ति की महिलाएँ, मिशन ध्रुव के छात्र-छात्राएँ और हमारे पारंपरिक कुम्हार भाई-बहन शामिल हैं। मिशन शक्ति के अंतर्गत महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया है। इन महिलाओं ने अपने हाथों से सुंदर, पर्यावरण के अनुकूल और आकर्षक दीये बनाए हैं। इसी प्रकार, मिशन ध्रुव के छात्र भी अपनी कला और रचनात्मकता का प्रयोग कर विभिन्न प्रकार के दीये तैयार कर रहे हैं, जिससे उन्हें न केवल आत्मविश्वास मिलता है बल्कि एक छोटी उम्र में ही समाजसेवा की भावना भी विकसित होती है।
सबसे महत्वपूर्ण योगदान हमारे देश के कुम्हार समुदाय का है, जिनकी पीढ़ियाँ मिट्टी से दीये बनाकर हम सबके घरों को रौशन करती आ रही हैं। आज जब मशीनों ने परंपरागत हस्तशिल्प को चुनौती दी है, तब इन कारीगरों को हमारा सहयोग पहले से कहीं अधिक आवश्यक है।
₹125/- की आशा और उजाला
‘मिशन उजाला’ के अंतर्गत प्रत्येक दीया पैक की कीमत मात्र ₹125/- रखी गई है। यह राशि सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है। यह न केवल एक परिवार की आजीविका में योगदान देती है बल्कि उन्हें यह एहसास कराती है कि समाज उनके साथ है, उनकी कला और परिश्रम की कद्र करता है। जब आप एक पैकेट दीये खरीदते हैं, तो आप केवल मिट्टी का एक दीपक नहीं खरीदते, बल्कि किसी के जीवन में रौशनी, उम्मीद और आत्मनिर्भरता का दीप जलाते हैं।
वोकल फॉर लोकल एक संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को आत्मसात करते हुए यह आवश्यक है कि हम स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। त्योहारों के समय जब मांग अधिक होती है, तब अगर हम अपने देश के उत्पादों को प्राथमिकता दें, तो यह हमारे देश की अर्थव्यवस्था को भी मज़बूती प्रदान करता है। दीपावली सिर्फ अपने घर को रौशन करने तक सीमित न रखें बल्कि दूसरों के घरों में भी उजाला फैलाने का माध्यम बनें। मिशन उजाला का हिस्सा बनकर हम एक छोटे-से प्रयास से बड़े परिवर्तन का कारण बन सकते हैं। एक दीया जलाकर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना शायद यही दीपावली का असली उद्देश्य है।