संसद का मानसून सत्र इस बार भी काफी हंगामेदार रहा है। विपक्ष की ओर से विभिन्न मुद्दों – मणिपुर हिंसा, पेगासस, महंगाई, बेरोजगारी, और सांप्रदायिक तनाव – को लेकर बार-बार हंगामा किया जा रहा है, जिससे संसद की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से मंगलवार को संसद परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी सहयोगी दलों के सांसद हिस्सा लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इसे संबोधित करेंगे।
क्या है बैठक का मुख्य एजेंडा?
सूत्रों के अनुसार इस बैठक में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो सकती है: विपक्ष की रणनीति का जवाब कैसे दिया जाए – सरकार सदन में कामकाज कराना चाहती है, लेकिन विपक्ष की तरफ से विरोध और नारेबाजी जारी है। उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारी – बैठक ऐसे समय में हो रही है जब जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव होने वाला है। NDA उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाई जा सकती है।
जनहित योजनाओं का प्रचार – सरकार चाहती है कि सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में केंद्र की योजनाओं की जानकारी दें, जिससे जनता के बीच सरकार की छवि मजबूत हो। 2026 की तैयारियां और 2029 के रोडमैप पर चर्चा – लंबी राजनीतिक योजना को भी लेकर बैठक में शुरुआती बातें हो सकती हैं।
5 अगस्त क्यों है भाजपा के लिए खास?
5 अगस्त की तारीख भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर में कई मायनों में ऐतिहासिक रही है।
राम मंदिर भूमि पूजन (2020)
5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ था। इस ऐतिहासिक दिन को लेकर भाजपा के समर्थकों के बीच गहरी भावनाएं जुड़ी हैं।
अनुच्छेद 370 हटाने का दिन (2019)
5 अगस्त 2019 को ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था, जिससे वहां विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हुआ और यह कदम भाजपा के एजेंडे का एक बड़ा वादा था। इसलिए यह तारीख पार्टी के लिए राजनीतिक और वैचारिक विजय दिवस के रूप में देखी जाती है।
पीएम मोदी का संबोधन: क्या कह सकते हैं प्रधानमंत्री?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक के माध्यम से:
- सांसदों को एकजुटता बनाए रखने का संदेश दे सकते हैं।
- जनता से जुड़ाव बढ़ाने के लिए सक्रिय रहने की अपील कर सकते हैं।
- विपक्ष के हंगामे के बीच ‘सकारात्मक राजनीति’ पर जोर देने की बात कर सकते हैं।
- आगामी विधानसभा चुनावों (महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, दिल्ली आदि) को लेकर संकेत दे सकते हैं।
- संभवतः राम मंदिर और कश्मीर के मुद्दे पर भावनात्मक अपील भी कर सकते हैं।
सियासी नजरिए से क्या है इस बैठक का महत्व?
विपक्षी INDIA गठबंधन जहां सरकार को घेरने की लगातार कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा और एनडीए अब भी राजनीतिक लीड बरकरार रखने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस बैठक के माध्यम से भाजपा यह संकेत देना चाहती है कि सत्ता पक्ष अब भी एकजुट, संगठित और विजन के साथ आगे बढ़ रहा है।