मुंबई। देश के प्रमुख कारोबारी और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें ₹17,000 करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है।
ईडी ने उन्हें 5 अगस्त 2025 को मुंबई स्थित अपने मुख्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अधिकारियों के अनुसार, यह समन एक बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें कई कंपनियों द्वारा लिए गए बैंकों के कर्ज और उनके कथित दुरुपयोग की जांच की जा रही है।
क्या है मामला?
यह मामला भारत के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कई बैंकों से जुड़े उन ₹17,000 करोड़ के कर्ज का है जो रिलायंस ग्रुप की कुछ कंपनियों को दिए गए थे, और बाद में वे एनपीए (Non-Performing Assets) घोषित हो गए। प्रवर्तन निदेशालय को शक है कि इन कर्जों के माध्यम से धोखाधड़ी, फंड डायवर्जन, और अनियमित वित्तीय लेनदेन किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जिन कंपनियों पर नजर है, उनमें शामिल हैं:
- Reliance Communications
- Reliance Infratel
- Reliance Naval and Engineering Ltd
- Reliance Capital
इनमें से कुछ कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency) से भी गुजर चुकी हैं।
ईडी की रणनीति क्या है?
ईडी इस जांच को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत आगे बढ़ा रही है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि अनिल अंबानी से यह जानने की कोशिश की जाएगी कि:
- किस कंपनी ने किन बैंकों से लोन लिया?
- लोन का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया?
- क्या कंपनी ने जानबूझकर भुगतान नहीं किया?
- क्या धन किसी अन्य चैनल से बाहर भेजा गया (FEMA उल्लंघन)?
बाजार पर असर
ईडी की इस कार्रवाई की खबर के तुरंत बाद रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी से गिरावट देखी गई।
- Reliance Power के शेयर 7.5% गिरे
- Reliance Capital में 5% की गिरावट
निवेशकों में बेचैनी
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला लंबा खिंचता है तो इससे निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है और लोन देने वाले बैंकों पर भी असर पड़ेगा।
अनिल अंबानी की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक अनिल अंबानी या रिलायंस ग्रुप की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, पहले भी ऐसे मामलों में वे यह कहते आए हैं कि “उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया और हमेशा कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है।” कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि ईडी को संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो अगला कदम गिरफ्तारी या संपत्ति जब्ती भी हो सकता है।
कर्ज का गणित
अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप पर कई बैंकों का भारी कर्ज है। अनुमान के मुताबिक, केवल Reliance Communications पर ही ₹45,000 करोड़ से अधिक का कर्ज है, जिसमें से ₹17,000 करोड़ विवादित और धोखाधड़ी श्रेणी में चिन्हित किया गया है। SBI, PNB, IDBI, Axis Bank, Yes Bank जैसे बैंकों ने इन कंपनियों को लोन दिया था।
जांच का अगला कदम
- 5 अगस्त को अनिल अंबानी की पेशी के बाद ईडी आगे की रणनीति तय करेगी
- विदेशी ट्रांजैक्शन की जांच के लिए FEMA और FDI रूट पर नजर
- जरूरी हुआ तो अन्य निदेशकों और CFO से भी पूछताछ होगी
- ED जल्द ही बैंक अधिकारियों और ऑडिटर्स को भी बुला सकती है
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
वित्तीय विशेषज्ञ नीलम कपूर का कहना है: “ईडी की जांच यदि सही दिशा में गई तो यह भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र में जवाबदेही की बड़ी मिसाल बनेगी। लेकिन जांच निष्पक्ष और तेज होनी चाहिए, वरना सियासी रंग भी चढ़ सकता है।”