विन न्यूज़ नेटवर्क। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों और विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टाल दी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होने की संभावना है।
याचिकाकर्ताओं को 10 दिन में देना होगा जवाब
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। उन्होंने अदालत को बताया कि आयोग का जवाब पिछली रात ही दाखिल किया गया था, इसलिए उसका अध्ययन कर अपना पक्ष तैयार करने के लिए समय चाहिए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, अदालत ने कहा कि यदि चुनाव आयोग कोई अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करना चाहता है, तो वह 14 दिनों के भीतर ऐसा कर सकता है।
ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर क्या हैं सवाल?
इन याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके और चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण निर्णय एकतरफा तरीके से लिए गए, जबकि उन्हें सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिया जाना चाहिए था। विशेष रूप से SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को लेकर आपत्तियां जताई गई हैं।
याचिकाकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर भी सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इनसे जुड़ी याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला किया है, ताकि संबंधित मुद्दों पर संयुक्त रूप से विचार किया जा सके।
चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा?
सुनवाई से पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया। आयोग ने याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि SIR से संबंधित फैसलों पर उठाए गए कई सवाल समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर आधारित हैं और तथ्यों से मेल नहीं खाते।
आयोग ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिए हैं और कोई भी निर्णय एकतरफा तरीके से नहीं किया गया। हलफनामे में यह भी कहा गया कि मतदाता सूची में किसी नाम को जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) की भूमिका और निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। आयोग के मुताबिक, फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
SIR प्रक्रिया और मतदाताओं के सत्यापन पर भी पक्ष रखा
चुनाव आयोग ने हलफनामे में अनमैप्ड मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। आयोग के अनुसार, ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना हर स्थिति में अनिवार्य नहीं है। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर आवश्यक दस्तावेज जुटा सकते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर अदालत में आगे सुनवाई होनी बाकी है।
राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने दाखिल की याचिकाएं
इस मामले में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत राय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एम.ए. बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ई.टी. मोहम्मद बशीर समेत विपक्षी नेताओं की याचिकाएं शामिल हैं। याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
इसके अतिरिक्त, तृणमूल कांग्रेस की नेता डोला सेन की ओर से दाखिल नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए उसे अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है।
अब अदालत में अगली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के जवाब और चुनाव आयोग के पक्ष पर विचार किए जाने की उम्मीद है। मामले में अंतिम निर्णय आने तक SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर उठाए गए सवालों पर न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी।