विन न्यूज़ नेटवर्क। आजकल फैटी लिवर की समस्या सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र के बच्चों में भी लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे बच्चों की बदलती दिनचर्या, खान-पान की आदतें और शारीरिक गतिविधियों में कमी बड़ी वजह बनकर सामने आ रही है। खासकर ज्यादा वजन वाले बच्चों में इस समस्या का खतरा बढ़ सकता है।
ज्यादा कैलोरी और मीठी चीजों का असर
फ़ोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग़ के सीनियर डायरेक्टर और एचओडी, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी डॉ. रमेश गर्ग के अनुसार, बच्चों में फैटी लिवर का एक प्रमुख कारण अधिक वजन और मोटापा है। जब बच्चे लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेते हैं और शरीर को पर्याप्त शारीरिक मेहनत नहीं मिलती, तो अतिरिक्त वसा शरीर में जमा होने लगती है। इसका असर लिवर पर भी पड़ सकता है।
बच्चों की डाइट में लगातार जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा चीनी वाली चीजों का शामिल होना भी चिंता की वजह है। इसके अलावा बार-बार बाहर का खाना खाने की आदत भी वजन बढ़ाने के साथ लिवर पर असर डाल सकती है।
मोबाइल और टीवी ने घटाया खेल का समय
बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को भी इस समस्या से जोड़कर देखा जा रहा है। मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम में ज्यादा समय बिताने से बच्चों का आउटडोर खेल और रोजाना की शारीरिक गतिविधि कम हो रही है। लंबे समय तक बैठे रहना और कम एक्टिव रहना वजन बढ़ने का कारण बन सकता है।
हालांकि हर बच्चे में फैटी लिवर की वजह सिर्फ जीवनशैली ही हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं।
शुरुआत में आसानी से पता नहीं चलता
फैटी लिवर की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती दौर में इसके खास लक्षण दिखाई नहीं देते। कुछ बच्चों को थकान महसूस हो सकती है या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्की परेशानी हो सकती है। कई बार बढ़ते वजन के दौरान भी यह समस्या सामने आती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बच्चे के मोटापे को देखकर फैटी लिवर की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसी तरह सामान्य वजन वाले बच्चे में भी यह समस्या हो सकती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और उचित जांच जरूरी है।
खान-पान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी
बच्चों को संतुलित और घर का बना खाना देना, मीठे व पैकेज्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करना और रोजाना शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करना मददगार हो सकता है। स्क्रीन टाइम कम करके बच्चों को खेलकूद और आउटडोर गतिविधियों से जोड़ना भी जरूरी है।
अगर बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा है या डॉक्टर को फैटी लिवर की आशंका है, तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। शुरुआती चरण में खान-पान और जीवनशैली में उचित बदलाव से लिवर में जमा अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद मिल सकती है।